पीली धूप का आमंत्रण
हिंदी कवितापीली धूप का आमंत्रणआज आँगन में उतरी हैधीरे-धीरे,जैसे किसी माँ नेनींद से भरे बच्चे को सहलाकर जगाया हो। पीली धूप नेखिड़की पर दस्तक दी—“उठो…दिन तुम्हें पुकार रहा है।” सरसों के खेतों नेअपनी पीली चूनर फैलाई है,और हवा ने उसमेंसुगंध का संगीत भर दिया है। धूप कहती है—“मत रहो बंद कमरों में,बाहर आओ…जहाँ उम्मीदें खुली हवा […]
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