हिंदी कविता

श्रृंखलाएँ – रामनाथ साहू ननकी

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श्रृंखलाएँ – रामनाथ साहू ननकी हे काव्य कामिनी ,तुम ही मेरी ताकत हो ।नूर इलाही दावत हो ।।अल्लाह खुशी सरगम सीसुब्हो शाम इबादत हो ।। हे चित्त स्वामिनी ,छंद प्रीत की पदावली ।सदा सुगंधित एक कली ।।कमलिनी गंध स्वर्गिक सुख ,प्रेमिल नयी भावाँजली ।। हे भव्य भामिनी ,हर अंक पृष्ठ पर होते ।प्रणयी उर्वरता बोते […]

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कोहिनूर की आभा – डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर

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कोहिनूर की आभा – डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर सत्यनाम के ज्ञान का,करो हृदय में ध्यान। गुरुवर की पाकर कृपा,बनना परम महान।। सत्य वचन नित बोलिए,यह मिश्री का घोल।तन मन को पावन करें,अनुपम मीठे बोल।। पावनता मन में रहे , फैले ज्ञान प्रकाश।दर्पण सम स्वछन्द हो,जीवन का आकाश।। बढ़ जाता मन भाव में,सहज प्रखर विश्वास।जब करते हम

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कौन आवाज उठाए – पंडित अमित कुमार शर्मा

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कौन आवाज उठाए – पंडित अमित कुमार शर्मा बदल गई जिंदगी देश केउगते सूरज कीलगा ग्रहण अब उनके उम्मीद कीसारे सपने टूट गए मां बाप की। चार दीवारों के बीच हर पलकिताबो के साथ जीते हैंहर रातों को वो दिन समझते हैएक एक पैसे से सफ़लता कीकहानी लिखते है। देश को शिखर तक ले जाने

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Jai Sri Ram kavitabahar

राम का आना /अजय विश्वकर्मा

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राम/श्रीराम/श्रीरामचन्द्र, रामायण के अनुसार,रानी कौशल्या के सबसे बड़े पुत्र, सीता के पति व लक्ष्मण, भरत तथा शत्रुघ्न के भ्राता थे। हनुमान उनके परम भक्त है। लंका के राजा रावण का वध उन्होंने ही किया था। उनकी प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है क्योंकि उन्होंने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्र, माता-पिता तक का त्याग किया। राम का आना /अजय विश्वकर्मा बालक रूप में राम का आना,सतयुग में धरती का उद्धार कराना।अधर्मी निशाचरों

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पोस्टर ब्वाय लगते हैं -अनिल कुमार वर्मा

समाज और यथार्थ

पोस्टर ब्वाय लगते हैं -अनिल कुमार वर्मा बैनर छाप लोग नेता नहीं, पोस्टर ब्वाय लगते हैं -अनिल कुमार वर्मा जब से प्लास्टिक फ्लेक्स का चलन हुआ है तब से इसका उपयोग बहुत ज्यादा हो गया है। जन्मदिन, उत्सव, त्यौहार, स्वागत और नववर्ष की बधाई के बहाने आज तथाकथित नेता अपने बड़े बड़े फोटो लगे हुए

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लाला लाजपत राय -सन्त राम सलाम

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लाला लाजपत राय – सन्त राम सलाम द्वारा रचित हाथ जोड़ने से नहीं मिलेगा,न भीख और न कोई अधिकार।आजादी के लिए बनना होगा,गरम लोहा से बनकर हथियार।। लाल बाल पाल गरम दल के नेता,भारतीय क्रांतिकारी में नाम गिनाए।पुलिस अफसर सांडर्स को गोली से,राज गुरु व भगतसिंह ने मार गिराए।। गुलाब देवी थी लाजपत राय की

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मैं हिंदुस्तान हूं – शशि मित्तल “अमर”

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मैं हिंदुस्तान हूं – शशि मित्तल “अमर” लहर-लहर लहराए तिरंगाबीच अशोक चक्र महान हूंहां मैं हिंदुस्तान हूं……….. तीन रंगों से सजा तिरंगाश्वेत,हरा,केसरिया की शान हूंहां मैं हिंदुस्तान हूं………….. भगत, सुभाष,आजाद की धरतीवीरांगना रानी झांसी की पहचान हूंहां मैं हिंदुस्तान हूं……………. हिंदू -मुस्लिम,सिख- ईसाईआपास में हैं सब भाई-भाईअलौकिक भाईचारे की जान हूंहां मैं हिंदुस्तान हूं………….. हिमालय

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प्रजा ही है असली राजा – प्यारेलाल साहू

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प्रजा ही है असली राजा – प्यारेलाल साहू प्रजा बजा सकती है बड़े बड़ों का बाजा।प्रजा ही है इस देश का प्यारे असली राजा।। मंत्री समझ बैठे हैं खुद को भारत भाग्य विधाता।पता चलता है औकात तब, जब चुनाव है आता।। हाथ जोड़ते नाक रगड़ते कहते माई बाप।माफ कर कर दो अनजाने में हो गये

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राष्ट्र ध्वज वंदना – पं.शिवम् शर्मा

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राष्ट्र ध्वज वंदना – पं.शिवम् शर्मा हे गौरव प्रमाण राष्ट्र ध्वजतुम्हे साष्टांग नमन,तेरे ही क्षत्र छाया में बना चमन सारा वतन…. हे अभिमान सूचक,हे कीर्ति वर्धक,तुम्हे कोटि कोटि अभिनन्दन….. करके स्पर्श तेरा ही,पुलकित हो उठे पवन ,देख कर शौर्य रूप तेरागर्व से सीना फुलाले गगन…. तेरे ही रंग से रंगे हैये सूर्य ये मयंकतुझसे लेकर

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संविधान पर कुंडलियाँ- डिजेन्द्र कुर्रे

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संविधान पर कुंडलियाँ- डिजेन्द्र कुर्रे साधक थे संविधान के,रचकर नव इतिहास।संविधान के नाम से,जाहिर जिनका नाम। जाहिर जिनका नाम,हिंद ही सब कुछ माने।बढ़े देश का मान ,मर्म यह ही पहचाने । कह डिजेन्द्र करजोरि,नहीं अब कोई बाधक।देश किया मजबूत,भारती का बन साधक।। डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”

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बेटी (चौपाईयाँ) – डॉ एन के सेठी

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बेटी (चौपाईयाँ) – डॉ एन के सेठी बेटी करती घर उजियारा।दूर करे जग काअँधियारा।।बेटी होती सबकी प्यारी।लगती है सबसे ही न्यारी।। सृष्टा की सुंदर सृष्टी है।करती खुशियों की वृष्टी है।।बेटी घर को पावन करती।घर पूरा खुशियों से भरती।। बेटी आन बान घर घर की।बेटी रौनक है इस जग की।। बेटी आँगन की फुलवारी।पापा की है

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अमल करें- रामनाथ साहू ” ननकी “

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अमल करें- रामनाथ साहू ” ननकी “ सरल करें ।आओ बुनियादी बातों पर , अमल करें ।। जीवन वृत प्रमेय अनसुलझा , सफल करें ।अभी अभिक्षमता सुदृढ बने , अचल करें ।। चित चंचलता संयम निष्ठा , महल करें ।आदर्शों के लिए कठिन व्रत , कँवल करें ।। भ्रम विद्वेषण , स्वार्थपरकता , विफल करें

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