बारी के पताल
वाह रे हमर बारी के पताल ।
ते दिखथस सुघ्घर लाल लाल ।।
गरीब अमीर दुनो तोला भाथे ।
झोला मे भर भरके तोला लाथे ।।
तोर बिना कुछु साग ह नइ मिठाये ।
सलाद बनाके तोला भात मे खाये ।।
धनिया मिरची मिलाके चटनी बनाथे।
रोटी अऊ बासी मे चाट चाट के खाथे।।
वाह रे हमर बारी के पताल।
ते दिखथस सुघ्घर लाल लाल ।।
*महेन्द्र देवांगन “माटी”* ✍
*पंडरिया छत्तीसगढ़*
?????????
📢 शेयर करें
🔐 PDF और प्रमाण पत्र के लिए login करें
📢 शेयर करें
🔐 PDF और प्रमाण पत्र के लिए login करें
