धनतेरस पर कविता-सुकमोती चौहान रुचीBy कविता बहार / विविध छंदबद्ध काव्य धनतेरस पर कविता सजा धजा बाजार, चहल पहल मची भारीधनतेरस का वार,करें सब खरीद दारी।जगमग होती शाम,दीप दर दर है जलते।लिए पटाखे हाथ,सभी बच्चे खुश लगते।खुशियाँ भर लें जिंदगी,सबको है शुभकामना।रुचि अंतस का तम मिटे,जगे हृदय सद्भावना।✍ सुकमोती चौहान “रुचि” 📢 इस पोस्ट को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें: 📲 WhatsApp ✈ Telegram 📘 Facebook Related Posts सड़क पर कविता गौरैया पर कविता गौरी पर दोहे माँ कुष्माण्डा पर कविता बेटी पर दोहे -सुकमोती चौहान चैत्र नवरात्र पर घनाक्षरीLeave a CommentYour email address will not be published. Required fields are marked *Type here.. Name* Email* Website Save my name, email, and website in this browser for the next time I comment.