प्रेरणा दायक कविता – आज चुकाना है ऋण तुमको अपनी माँ के प्यार का

प्रेरणा दायक कविता

प्रेरणा दायक कविता – आज चुकाना है ऋण तुमको अपनी माँ के प्यार का


उठो, साथियो ! समय नहीं है बहशोभा-अंगार का।
आज चुकाना है ऋण तुमको अपनी माँ के प्यार का॥


प्राण हथेली पर रख-रखकर, चलना है मैदान में।
फर्क नहीं आने देना है देश, जाति की शान में।
सबके आगे एक प्रश्न है सीमा के अधिकार का।
उठी, साथियो! समय नहीं है वह शोभा श्रृंगार का।


बच्चे-बच्चे के हाथों में हिम्मत का हथियार दो।
जो दुश्मन चढ़कर आया है उसको बढ़कर मार दी।
समय नहीं है यह फूलों का, अंगारों के हार का।

आज चुकाना है ऋण तुमको अपनी माँ के प्यार का।
सबसे बढ़कर शक्ति समय की आज तुम्हारे पास है।
तुम्हें खून से अपने लिखना आज नया इतिहास है।


दुश्मन घुस आया है भीतर, क्या होगा घर-बार का?
उठो, साथियो! समय नहीं है यह शोभा-श्रृंगार का।
आज चुकाना है ऋण तुमको अपनी माँ के प्यार का।

प्रेरणा दायक कविता

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top