प्रेरणा दायक कविता – हम मस्तों में आन मिले

हम मस्तों में आन मिले

हम मस्तों में आन मिले, कोई हिम्मतवाला रे,
दल बादल-सा उमड़ पड़ा, यह दल मतवाला रे।
हम मस्तों में आन मिले, कोई हिम्मतवाला रे।

बिजली-सी तड़पन नस-नस में,
आज नहीं हम अपने बस में,
युग-युग का अन्याय उठाकर,
अब तो सब्र उछाला रे।
हम मस्तों में आन मिले, कोई हिम्मतवाला रे।

तूफानों से टक्कर लेंगे,
पर्वत को भी चीर चलेंगे,
नव रक्त में उबाल भरा है,
धधकी जीवन-ज्वाला रे।
हम मस्तों में आन मिले, कोई हिम्मतवाला रे।

न डर शेष, न संशय बाकी,
सपनों की अब हुई सगाई,
जाग उठी है सोई शक्ति,
बदलेगा उजियाला रे।
हम मस्तों में आन मिले, कोई हिम्मतवाला रे।

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top