हम तुमसे प्यार करते हैं

हम तुमसे प्यार करते हैं

हाँ यही सच है हम तुमसे प्यार करते हैं
जानेजाना हाँ यही सच है तुमपे मरते हैं
तुम न होते हो तो तस्वीर से बतियाते हैं
दिल के नज़दीक ला हम धड़कन तुम्हें सुनाते हैं
होश खो देते हैं तुम्हेँ सामने जब पाते हैं
बेख़ुदी में तुम्हें ही सोच मुस्कुराते हैं
पास आ जाओ तुम्हारा इंतज़ार करते हैं
हाँ यही सच……
बहुत अरमान सजाएं हैं दिल ने तेरे लिए
बज उठे आज दिल के साज सनम तेरे लिए
बोलो न तेरा दिल भी धड़का है क्या मेरे लिए
रातों को जगती हूँ मैं तू जगता है क्या मेरे लिए
तेरे क़दमों में सनम जाँ अपनी निसार करते हैं
हाँ यही सच…
बहुत शिद्द्त है ‘चाहत’ है मोहब्बत है
तेरे ही दम से ज़िन्दा हैं यही हकीकत है
तू ही रहबर है यार तू ही अब इबादत है
इश्क़ है सच्चा मेरा ये नहीं तिज़ारत है
तुम नहीं बेवफ़ा इसपर ऐतबार करते हैं
हाँ यही सच…….


नेहा चाचरा बहल ‘चाहत’
झाँसी
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

इस रचना को शेयर करें

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Scroll to Top