ले ली जिंदगी ने करवट
रहता नहीं यहां; कुछ भी पहले सा।
सब बदल रहा है , तू भी बदल।
छिपता कहां है कुछ भी किसी से,
छिप छिपके , क्या निकले हल?
करना यहां जो भी
सच्चाई के दम पे
कर लेना तू झटपट
ले ली जिंदगी ने करवट ।
बसना नहीं है, बढ़ना है तुझे।
अपनों से रो के लड़ना है तुझे।
खुशियों के घरौंदे, दुख के तिनकों से
आंसू की नमी से गड़ना है तुझे।
अपने हाथों से काबिल हाथों को
सौंपना है पाकर
समय की आहट।
ले ली जिंदगी ने करवट ।
बचपन की बातें, अब बस बातों में।
जवानी रवानी, बीत चली रातों में।
सब मौज किए, बेखौफ किए
अब बस लाठी, कांपते हाथों में।
लाख सपने सजाये
पर कुछ ना हाथ आये
एक वही बुलाये
सबकी मंजिल
सबका घर मरघट।
ले ली जिंदगी ने करवट ।
-मनीभाई नवरत्न





