सूखा पर हरा-भरा दरख्त
हिंदी कविताजीवन में आशावादी होना ही जीवन का परिचायक है ।
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जीवन में आशावादी होना ही जीवन का परिचायक है ।
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प्रस्तुत हिंदी छठ गीत का शीर्षक “कवन सुगवा मार देलस ठोरवा” है जोकि आशीष कुमार, मोहनिया, बिहार की रचना है. यह उत्तर भारतीयों की आस्था की के महान पर्व छठ पर्व को आधार मानकर लिखा गया है.
छठ गीत- कवन सुगवा मार देलस ठोरवा – आशीष कुमार Read More »
यह सपने सुकुमार कविता |महादेवी वर्मा यह सपने सुकुमार तुम्हारी स्मित से उजले!कर मेरे सजल दृगों की मधुर कहानी,इनका हर कण हुआ अमर करुणा वरदानी,उडे़ तृणों की बात तारकों से कहने यहचुन प्रभात के गीत, साँझ के रंग सलज ले! लिये छाँह के साथ अश्रु का कुहक सलोना,चले बसाने महाशून्य का कोना कोना,इनकी गति में
महादेवी वर्मा के १० सर्वश्रेष्ठ कवितायेँ Read More »
कविता सांसारिक चक्र के दुःख संकट से घबराकर भागने की अपेक्षा इन सब विपत्तियों को चुनौती की तरह स्वीकार कर कृष्ण के कर्मयोग पथ पर चलने की राह प्रशस्त करती है।
हृदय के ताप हरे-सत्यम प्रकाश ‘ऋतुपर्ण’ Read More »
विधा:- पद्य/कविता विषय:-स्त्री शक्ति की प्रतिमूर्ति रचना शीर्षक:- *सर्वशक्ति का रूप है नारी* रचनाकार नाम :- *डी कुमार–अजस्र(दुर्गेश मेघवाल,बून्दी/राज.)* प्रतियोगिता के लिए:- हाँ प्रतियोगिता नियमावली मंजूर:- हाँ डाक प्राप्ति पता :- दुर्गेश कुमार मेघवाल(व्याख्याता) आत्मज श्री प्रभू लाल मेघवाल ‘काला सदन’ पुराना माटुंदा रोड़ ,इंद्रा कॉलोनी बून्दी ,जिला बून्दी राजस्थान पिन:-323001 मोबाइल नम्बर :- 9461302199
सर्व शक्ति का रूप है नारी /रचयिता:-डी कुमार–अजस्र Read More »
प्रस्तुत हिंदी कविता “मोची” के रचयिता आशीष कुमार (मोहनिया, बिहार) हैं. इस कविता को “मोची” के जीवन को आधार मानकर रचा गया है.
मोची पर कविता – आशीष कुमार Read More »
दिल्ली देश की राजधानी है जहा राजनितिक हलचल का केंद्र रही है है एक कटाक्ष है दिल्ली के ऊपर / दिल्ली ने हमें क्या दिया और दिल्ली के दिल में क्या है /
बूढी दिल्ली पर कविता Read More »
हिंदी काव्य में नवीन विधि और प्रयोग के रूप में सृजित स्वरचित प्रेरणादायक अमात्रिक काव्य रचना –एक कदम चल…
एक कदम चल -डी कुमार अजस्र(अमात्रिक काव्य) Read More »
इस ग़ज़ल के माध्यम से संसार की भंगुरता और अस्थिरता की बात की जा रही है।अपने कर्तव्ययों का निष्ठापूर्वक निर्वहण करके गीता के आप्त वचनों को अंगीकार करने एवं सवेदनशील रहने की बात की गई है।
क्या भला रह जायेगा Read More »
यह मेरी मौलिक जागरण कविता है,जो उपेन्द्रवज्रा छंद में है।जब कभी मन जीवन के उद्देश्य से भटककर नैराश्य और अंधकार की ओर प्रवृत होने लगता है,तब यह कविता नई ऊर्जा और नया उद्देश्य देती है।
उठो जगो बंधु-जागरण कविता Read More »