कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

सोशल मीडिया की गलियारों में

हिंदी कविता

सोशल मीडिया की गलियारों में सोशल मीडिया की गलियारों मेंउठ चला जब से शेयर का दौरशब्दो में एक सन्देश कर दी हमने पोस्टबन रहे दोस्त कर रहे रिकवेस्टहम भी देते उन्हें रिस्पेक्टप्रोफाइल पर फोटो लगाकर देखे बारंबारदुसरो की अपडेट पोस्ट से रोज होती शुरुआतपर सोशल मीडिया में एक तरफ उड़ान तोदूसरी ओर है ऐसी दोस्तीभी […]

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नागार्जुन की १० लोकप्रिय रचनाएँ

हिंदी कविता

नागार्जुन की १० लोकप्रिय रचनाएँ यहाँ पर आपके समक्ष पस्तुत हैं चंदू, मैंने सपना देखा / नागार्जुन चंदू, मैंने सपना देखा, उछल रहे तुम ज्यों हिरनौटाचंदू, मैंने सपना देखा, अमुआ से हूँ पटना लौटाचंदू, मैंने सपना देखा, तुम्हें खोजते बद्री बाबूचंदू,मैंने सपना देखा, खेल-कूद में हो बेकाबू मैंने सपना देखा देखा, कल परसों ही छूट

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इंदौर की कवयित्री सुशी सक्सेना की कविताएं

हिंदी कविता

यहाँ पर इंदौर की कवयित्री सुशी सक्सेना की कविताएं आपके समक्ष प्रस्तुत किये किये जा रहे हैं ये इश्क ये इश्क का ही तो असर है,कि नजर भी जुबां बन जाती है।आपकी तारीफ में कुछ कहूं,तो ग़ज़ल बन जाती है। ये इश्क की इंतहा, नहीं तो क्या है,कि जिस तरफ भी देखती हूं,आपकी सूरत नज़र

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राजकिशोर धिरही के बेहतरीन बाल कवितायेँ

नारी जीवन और संवेदना,

बाल दिवस पर बेहतरीन बाल कवितायेँ राजकिशोर धिरही के द्वारा प्रस्तुत किये जा रहे हैं जो आपको बेहद पसंद आयेगी.

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मैथिलीशरण गुप्त की 10 लोकप्रिय कवितायेँ

प्रकृति और पर्यावरण

चारु चंद्र की चंचल किरणें / मैथिलीशरण गुप्त चारुचंद्र की चंचल किरणें, खेल रहीं हैं जल थल में,स्वच्छ चाँदनी बिछी हुई है अवनि और अम्बरतल में।पुलक प्रकट करती है धरती, हरित तृणों की नोकों से,मानों झीम[1] रहे हैं तरु भी, मन्द पवन के झोंकों से॥ पंचवटी की छाया में है, सुन्दर पर्ण-कुटीर बना,जिसके सम्मुख स्वच्छ शिला

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सुमित्रानंदन पंत की १० सर्वश्रेष्ठ कवितायेँ

समाज और यथार्थ

परिवर्तन / सुमित्रानंदन पंत (१)अहे निष्ठुर परिवर्तन!तुम्हारा ही तांडव नर्तनविश्व का करुण विवर्तन!तुम्हारा ही नयनोन्मीलन,निखिल उत्थान, पतन!अहे वासुकि सहस्र फन!लक्ष्य अलक्षित चरण तुम्हारे चिन्ह निरंतरछोड़ रहे हैं जग के विक्षत वक्षस्थल पर !शत-शत फेनोच्छ्वासित,स्फीत फुतकार भयंकरघुमा रहे हैं घनाकार जगती का अंबर !मृत्यु तुम्हारा गरल दंत, कंचुक कल्पान्तर ,अखिल विश्व की विवरवक्र कुंडलदिग्मंडल ! (२)आज कहां वह पूर्ण-पुरातन,

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माखनलाल चतुर्वेदी की १० सर्वश्रेष्ठ कवितायेँ

समय और जीवन दर्शन

दीप से दीप जले / माखनलाल चतुर्वेदी सुलग-सुलग री जोत दीप से दीप मिलेंकर-कंकण बज उठे, भूमि पर प्राण फलें। लक्ष्मी खेतों फली अटल वीराने मेंलक्ष्मी बँट-बँट बढ़ती आने-जाने मेंलक्ष्मी का आगमन अँधेरी रातों मेंलक्ष्मी श्रम के साथ घात-प्रतिघातों मेंलक्ष्मी सर्जन हुआकमल के फूलों मेंलक्ष्मी-पूजन सजे नवीन दुकूलों में।। गिरि, वन, नद-सागर, भू-नर्तन तेरा नित्य

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विश्व करुणा दिवस पर विशेष शायरी

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता

एक बेटी की करूणा जो अपने जन्म पर अपराधी सा महसूस करती अपनी मां को धैर्य बंधाती है

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बाल भिक्षुक -आशीष कुमार

समाज और यथार्थ,

प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक “बाल भिक्षुक” है जोकि आशीष कुमार मोहनिया, कैमुर, बिहार की रचना है. इसे वर्तमान समाज में दीन हीन अनाथ बच्चों की दयनीय स्थिति को ध्यान में रखकर लिखा गया है जिनका जीवन बसर आज भी मंदिर की सीढ़ियों पर या फिर हाट बाजार में भीख मांग कर होता है.

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