कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

११ मात्रिक नवगीत – पीत वर्ण पात हो

मन और भावनाएँ

११ मात्रिक नवगीत – पीत वर्ण पात हो घाव ढाल बन रहे. स्वप्न साज बह गये।. पीत वर्ण पात हो. चूमते विरह गये।। काल के कपाल पर. बैठ गीत रच रहा. प्राण के अकाल कवि. सुकाल को पच रहा. सुन विनाश गान खगरोम की तरह गये।पीत वर्ण……….।। फूल शूल से लगेमीत भयभीत छंदरुक गये विकास […]

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सरसी छंद विधान – होलिका आई

हिंदी कविता

होली वसंत ऋतु में मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण भारतीय और नेपाली लोगों का त्यौहार है। यह पर्व हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है। विकिपीडिया

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प्रतीक्षा पर कविता

हिंदी कविता

प्रतीक्षा पर कविता आयु ही जैसे प्रतीक्षा-श्रृंखला है,हर प्रतीक्षा पूर्ण कब होती भला है! रवि प्रतीक्षित धर्मरत हैं पूर्व-पश्चिम,सूर्य मिलकर पूर्व से पश्चिम चला है। धैर्य से जिस बीज ने की है प्रतीक्षा,वृक्ष सुंदर हो वही फूला-फला है। झूठ है आलस्य को कहना प्रतीक्षा,उन्नयन के मार्ग पर यह तो बला है। व्यग्रता को त्याग,धीरज को

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खुद को है -मनीभाई ‘नवरत्न’

हिंदी कविता

यहाँ पर मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित खुद को है आप पढ़ेंगे आशा आपको यह पसंद आएगी खुद पर कविता -मनीभाई ‘नवरत्न’ खुद को है जिन्दगी के हरेक  दंगल में …लड़ना खुद को है।   भिड़ना खुद को है।  टुटना खुद को है।  जुड़ना खुद को है। ये वक्त,बेवक्त माँगती हैं कुर्बानियाँ…  बिखरना खुद को है।  सिसकना

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मशाल की मंजिल – मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मशाल की मंजिल – मनीभाई नवरत्न मशाल की मंजिल :-रचनाकार:- मनीभाई नवरत्नरचनाकाल :- 16 नवम्बर 2020 ज्ञानसतत विकासशीललगनशील,है जिद्दी वैज्ञानिक Iवह पीढ़ी दर पीढ़ीबढ़ा रहा अपना आकार Iवह कल्पना करतासिद्धांत बनाता स्वयंमेवउसकी प्रयोगशाला ये दुनिया।हम क्या ?बोतल में भरी रसायनया फिर बिखरी हुई मॉडलदीवाल में झूलता हुआ,कंकाल तंत्र सदृश। वो हमें परखता,देखता।हम पर घटित प्रतिक्रियाओं

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लघुकथा कैसे लिखें?

हिंदी कविता

लघुकथा कैसे लिखें? लघुकथा छोटी कहानी का अति संक्षिप्त रूप है । लघुकथा का लक्ष्य जीवन के किसी मार्मिक सत्य का प्रकाशन होता है जो बहुधा इस ढंग से अभिव्यक्त होता है जैसे बिजली कौंधती है। इसमें अत्यल्प साधनों द्वारा ही जीवन के चरम सत्य को उजागर करने की चेष्टा की जाती है। लघुकथाओं में

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तुम्हारा साथ काफी है -राजेश्वरी जोशी

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तुम्हारा साथ काफी है जिंदगी में तुम्हारा साथ काफी है, हाथों में मेरे तेरा हाथ काफी है। दूर हो या हो पास कोई बात नही है, तुम साथ हो यह एहसास काफी है। लड़ते भी रहते हैं,हँसते भी रहते है, पर हम हैं साथ- साथ यही काफी हैं। मेरे दर्द का तेरे दिल में ,अहसास

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फिर किसी मोड़ पर वो मिल जाएँ कहीं – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

हिंदी कविता

इस ग़ज़ल में किसी से मिलने की आरज़ू को बयाँ किया गया है |
फिर किसी मोड़ पर वो मिल जाएँ कहीं – ग़ज़ल – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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