कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

धर्मपत्नी पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

धर्मपत्नी पर कविता ( विधाता छंद, २८ मात्रिक ) हमारे देश में साथी,सदा रिश्ते मचलते है।सहे रिश्ते कभी जाते,कभी रिश्ते छलकते हैं। बहुत मजबूत ये रिश्ते,मगर मजबूर भी देखे।कभी मिल जान देते थे,गमों से चूर भी देखे। करें सम्मान नारी का,करो लोगों न अय्यारी।ठगी जाती हमेशा से,वहीं संसार भर नारी। हमारी धर्म पत्नी को,कहीं गृहिणी […]

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सुख-दुख की बातें बेमानी

हिंदी कविता

सुख-दुख की बातें बेमानी ( १६ मात्रिक ) मैने तो हर पीड़ा झेली,सुख-दुख की बातें बेमानी। दुख ही मेरा सच्चा साथी,श्वाँस श्वाँस मे रहे संगाती।मै तो केवल दुख ही जानूं,प्रीत रीत मैने कब जानी,सुख-दुख की बातें बेमानी। साथी सुख केवल छलना है,मुझे निरंतर पथ चलना है।बाधाओं से कब रुक पाया,जब जब मैने मन में ठानी,सुख-दुख

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village based Poem

अब तो मेरे गाँव में

हिंदी कविता

अब तो मेरे गाँव में . ( १६,१३ )अमन चैन खुशहाली बढ़ती ,अब तो मेरे गाँव में,हाय हलो गुडनाइट बोले,मोबाइल अब गाँव में। टेढ़ी ,बाँकी टूटी सड़केंधचके खाती कार में,नेता अफसर डाँक्टर आते,अब तो कभी कभार में। पण्चू दादा हुक्का खैंचे,चिलम चले चौपाल मे,गप्पेमारी ताश चौकड़ी,खाँप चले हर हाल में। रम्बू बकरी भेड़ चराता,घटते लुटते

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उड़ जाए यह मन

हिंदी कविता

उड़ जाए यह मन (१६ मात्रिक) यह,मन पागल, पंछी जैसे,मुक्त गगन में उड़ता ऐसे।पल मे देश विदेशों विचरण,कभी रुष्ट,पल मे अभिनंदन,मुक्त गगन उड़ जाए यह मन। पल में अवध,परिक्रम करता,सरयू जल मन गागर भरता।पल में चित्र कूट जा पहुँचे,अनुसुइया के आश्रम पावन,मुक्त गगन उड़ जाए यह मन। पल शबरी के आश्रम जाए,बेर, गुठलियाँ मिलकर खाए।किष्किन्धा

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समय सतत चलता है साथी

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय सतत चलता है साथी गीत(१६,१६) कठिन काल करनी कविताई!कविता संगत प्रीत मिताई!! समय सतत चलता है साथी,समय कहे मन त्याग ढ़िठाई।वक्त सगा नहीं रहा किसी का,वन वन भटके थे रघुराई।फुरसत के क्षण ढूँढ करें हमकविता संगत प्रीत मिताई। समय चक्र है ईष्ट सत्यता,वक्त सिकंदर,वक्त कल्पना।वक्त धार संग बहना साथी,मत देखे मन झूठा सपना।कठिन कर्म,पर्वत

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आओ सच्चेे मीत बनाएँ

हिंदी कविता

आओ सच्चेे मीत बनाएँ (१६,१६)आओ सच्चेे मीत बनाएँ,एक एक हम वृक्ष लगाएँ।बचपन में ये सुन्दर होते ,नेह स्नेह के भाव सँजोते। पालो पोषो गौरव होता।मधुर भाव हरियाली बोता।आज एक पौधा ले आएँ,आओ सच्चे मीत बनाएँ। यौवन मे छाँया दातारी,मीठे खट्टे फल खग यारी।चिड़िया,मैना पिक शुक आए,मधुर सरस संगीत सुनाए। सुन्दर नीड़,बसेरे सजते।पावन पंछी कलरव बजते।प्राण

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वर्षा-विरहातप

हिंदी कविता

वर्षा-विरहातप (१६ मात्रिक मुक्तक ) कहाँ छिपी तुम,वर्षा जाकर।चली कहाँ हो दर्श दिखाकर।तन तपता है सतत वियोगी,देखें क्रोधित हुआ दिवाकर। मेह विरह में सब दुखियारे,पपिहा चातक मोर पियारे।श्वेद अश्रु झरते नर तन से,भीषण विरहातप के मारे। दादुर कोकिल निरे हुए हैं,कागों से मन डरे हुए हैं।तन मन मेरे दोनो व्याकुल,आशंकी घन भरे हुए है। बालक

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मीत देश वंदन की ख्वाहिश

हिंदी कविता, ,

मीत देश वंदन की ख्वाहिश धरती पर पानी जब बरसेमनभावों की नदियाँ हरषे।नमन् शहीदों को ही करलें,छोड़ो सुजन पुरानी खारिश।मीत देश वंदन की ख्वाहिश। आज नेत्र आँसू गागर है,यादें करगिल से सागर है।वतन हितैषी फौजी टोली,कर्गिल घाटी नेहिल बारिश,मीत देश वंदन की ख्वाहिश। आतंकी हमलों को रोकें,अंदर के घपलों को झोंके।धर्म-कर्म अनुबंध मिटा कर,जाति धर्म

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पिता पर दोहे

हिंदी कविता

पिता पर दोहे पिता क्षत्र संतान के, हैं अनाथ पितुहीन।बिखरे घर संसार वह,दुख झेले हो दीन।। कवच पिता होते सदा,रक्षित हों संतान।होती हैं पर बेटियाँ, सदा जनक की आन।। पिता रीढ़ घर द्वार के,पोषित घर के लोग।करें कमाई तो बनें,घर में छप्पन भोग।। पिता ध्वजा परिवार के, चले पिता का नाम।मुखिया हैं करते वही ,

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तिरंगा (चौपाई छंद)

हिंदी कविता

तिरंगा (चौपाई छंद) आजादी का पर्व मनालो।खूब तिरंगा ध्वज पहरालो।।संगत रक्षा बंधन आया।भ्रात बहिन जन मन हर्षाया।।१ राखी बाँधो देश हितैषी।संविधान संसद सम्पोषी।।राखी बाँध तिरंगा रक्षण।राष्ट्र भावना बने विलक्षण।।२ जन जन का अरमान तिरंगा।चाहे बहिन भ्रात हो चंगा।।रक्षा सूत्र तिरंगा चाहत।धरा बहिन न होवे आहत।।३ राखी बंधन खूब कलाई।मान तिरंगे को निज भाई।।भारत का सम्मान

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शबरी के बेर(चौपाई छंद)

हिंदी कविता

शबरी के बेर(चौपाई छंद) त्रेता युग की कहूँ कहानी।बात पुरानी नहीं अजानी।।शबरी थी इक भील कुमारी।शुद्ध हृदय मति शील अचारी।।१ बड़ी भई तब पितु की सोचा।ब्याह बरात रीति अति पोचा।।मारहिं जीव जन्तु बलि देंही।सबरी जिन प्रति प्रीत सनेही।।२ गई भाग वह कोमल अंगी।वन ऋषि तपे जहाँ मातंगी।।ऋषि मातंगी ज्ञानी सागर।शबरी रहि ऋषि आयषु पाकर।।३ मिले

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मात पिता पूजन दिवस दोहे

नारी जीवन और संवेदना

मात पिता पूजन दिवस दोहे सीमा पर रक्षा करे, अपने वीर जवान।मरते मान शहीद से, जीते उज्ज्वल शान।। प्रेम दिवस पर है विनय , सुनिये सभी सुजान।मात पिता को नेह दें, मन विश्वासी मान।। न्यौछावर हैं देश पर , मातृभूमि के पूत।त्याग और बलिदान हित, क्षमता लिए अकूत।। मातृ शक्ति को कर नमन, नारी का

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