अब तो मेरे गाँव में

अब तो मेरे गाँव में

गाँव पर हिंदी कविता


. ( १६,१३ )
अमन चैन खुशहाली बढ़ती ,
अब तो मेरे गाँव में,
हाय हलो गुडनाइट बोले,
मोबाइल अब गाँव में।

टेढ़ी ,बाँकी टूटी सड़कें
धचके खाती कार में,
नेता अफसर डाँक्टर आते,
अब तो कभी कभार में।

पण्चू दादा हुक्का खैंचे,
चिलम चले चौपाल मे,
गप्पेमारी ताश चौकड़ी,
खाँप चले हर हाल में।

रम्बू बकरी भेड़ चराता,
घटते लुटते खेत में,
मल्ला काका दांव लगाता
कुश्ती दंगल रेत में।

पनघट एकल पाइंट, बने
नीर गया …पाताल़ मे,
भाभी काकी पानी भरती,
बहुएँ रहे मलाल… में।

भोले भाले खेती करते
रात ठिठुरे पाणत रात में।
मजदूरों के टोल़े मे भी
बात चले हर बात में।

चोट वोट मे दारु पीते,
लड़ते मनते गाँव में,
दुख, सुख में सब साझी रहते,
अब …भी मेरे गाँव में।

नेताओं के बँगले कोठे
अब तो मेरे गाँव में,
रामसुखा की वही झोंपड़ी
कुछ शीशम की छाँव में।

कुछ पढ़कर नौकर बन जाते,
अब तो मेरे गाँव मे,
शहर में जाकर रचते बसते,
मोह नही फिर गाँव में।

अमरी दादी मंदिर जाती,
नित तारो की छाँव में,
भोपा बाबा झाड़ा देता ,
हर बीमारी भाव मे।

नित विकास का नारा सुनते
टीवी या अखबार से,
चमत्कार की आशा रखते,
थकते कब सरकार से।

फटे चीथड़े गुदड़ी ओढ़े,
अब भी नौरँग लाल है,
स्वाँस दमा से पीड़ित वे तो,
असली धरती पाल है।

धनिया अब भी गोबर पाथे,
झुनिया रहती छान मे,
होरी अब भी अगन मांगता,
दें कैसे …गोदान में।

बीमारी की दवा न होती,
दारू मिलती गाँव में,
फटी जूतियाँ चप्पल लटके,
शीत घाम निज पाँव में।

गाय बिचारी दोयम हो गई,
. चली डेयरी चाव में,
माँगे ढूँढे छाछ न मिलती ,
, मिले न घी अब गाँव में।

अमन चैन खुशहाली बढ़ती ,
अब तो मेरे गाँव में,
हाय हलो गुडनाइट बोले
मोबाइल अब गाँव में।
————
बाबू लाल शर्मा,बौहरा

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