कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

पिता सदा आदर्श हैं (पिता पर दोहे)

हिंदी कविता

पिता सदा आदर्श हैं (पिता पर दोहे) ख्याल रखें संतान का, तजकर निज अरमान।खुशियाँ देते हैं पिता, रखतें शिशु का ध्यान। ।१ मुखिया बन परिवार का , करतें नेह समान ।पालन पोषण कर पिता , बनते हैं भगवान ।।२ जिसकी ऊँगली थामकर , चलना सीखें आज ।मातु–पिता को मान दें, करें हृदय में राज।।३ शीतल […]

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शरणार्थियों का सम्मान

हिंदी कविता

शरणार्थियों का सम्मान होकर मजबूर वो घर- द्वार छोड़ गए, पुराने सुरमई यादों से अपना मुँह मोड़ गए। दहशतगर्दों के साजिश से होकर नाकाम, फिरते इधर- उधर लोग यूं ही करते इनको बदनाम। उम्मीद भरी नैनो से जो देखा सपना, समय की मार से वो कभी न हुआ अपना। मिलता जब इनको सहयोग तो छा

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गंगा दशहरा (20 जून) पर गीत

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गंगा दशहरा (20 जून) पर गीत गोद में तुम सदा ही खिलाती रहो, प्यार से आज तुम ही दुलारो हमेंगंगा मइया यहाँ अब तारो हमें, कष्ट सारे मिटाकर उबारो हमें। मौत के बाद भी तो रहे वास्ता, तुम दिखाओ हमें स्वर्ग का रास्ताअस्थियाँ, भस्म सब कुछ समर्पित करें, फिर नई जिंदगी से भला क्यों डरें

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नभ में छाए काले मेघ

हिंदी कविता

नभ में छाए काले मेघ नभ में छाए काले मेघ.झूमती धरती इसको देख.बिन नीर प्यासी धरा पर,मेघ लाते आशाएं अनेक। खेत लहराए अपनी आँचल,बागों में आ जाती नई जान.रंग-बिरंगी कोमल पुष्पों से,छा जाती लबों में मुस्कान. हरियाली और खुशहाली,अब सुखहाली भी आएगी.बरसों से संजोया सपना ,वो भी अब पूरी हो जाएगी. आज तपी सूखी मिट्टी

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holi

होली पर्व -कुण्डलियाँ

हिंदी कविता

होली पर्व पर कुण्डलियाँ ( Holi par Kundaliya) का संकलन हिंदी में रचना आपके समक्ष पेश है . होली रंगों का तथा हँसी-खुशी का त्योहार है। यह भारत का एक प्रमुख और प्रसिद्ध त्योहार है, जो आज विश्वभर में मनाया जाने लगा है।  होली पर्व – कुण्डलियाँ होली के इस पर्व पर, मेटे सब मतभेद।भूल

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जिंदगी पर कविता

हिंदी कविता

जिंदगी पर कविता ज़िंदगी,क्यों ज़िंदगी से थक रही है,साँस पर जो दौड़ती अब तक रही है। मंज़िलें गुम और ये अंजान राहें,कामयाबी चाह की नाहक रही है । भूख भोली है कहाँ वो जानती है!रोटियाँ गीली, उमर ही पक रही है। हो गए ख़ामोश अब दिल के तराने,बदज़ुबानी महफ़िलों में बक रही है। लाश पर

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मिल्खा सिंह राठौड़ पर कविता

हिंदी कविता

मिल्खा सिंह राठौड़ पर कविता उड़न सिक्ख मिल्खा सिंह जी, इक राजपूत राठौड़ भए।दौड़ दौड़ कर दुनियां में, दिल से दिल को जोड़ गए।। वो उस भारत में जन्मे थे, जो आज पाक का हिस्सा है।कहूं विभाजन की क्या मैं, जो इक काला किस्सा है।।सिंह साक्षी थे उसके, जहां मारे कई करोड़ गए… अपने प्रियजन

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धर्म पर कविता- रेखराम साहू

हिंदी कविता

धर्म पर कविता- रेखराम साहू धर्म जीवन का सहज आधार मानो,धारता है यह सकल संसार मानो। लक्ष्य जीवन का रहे शिव सत्य सुंदर,धर्म का इस सूत्र को ही सार मानो। देह,मन,का आत्म से संबंध सम्यक्,धर्म को उनका उचित व्यवहार मानो। दंभ मत हो,दीन के उपकार में भी,दें अगर सम्मान तो आभार मानो। भूख का भगवान

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मणिकर्णिका-झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर कविता

नारी जीवन और संवेदना

मणिकर्णिका-झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर कविता अंग्रेजों को याद दिला दी, जिसने उनकी नानी।मर्दानी, हिंदुस्तानी थी, वो झांसी की रानी।। अट्ठारह सौ अट्ठाइस में, उन्नीस नवंबर दिन था।वाराणसी हुई वारे न्यारे, हर सपना मुमकिन था।।नन्हीं कोंपल आज खिली थी, लिखने नई कहानी… “मोरोपंत” घर बेटी जन्मी, मात “भगीरथी बाई”।“मणिकर्णिका” नामकरण, “मनु” लाड कहलाई।।घुड़सवारी, रणक्रीडा, कौशल,

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अब नहीं सजाऊंगा मेला

हिंदी कविता

अब नहीं सजाऊंगा मेला अक्सर खुद कोसाबित करने के लिएहोना पड़ता है सामने . मुलजिम की भांति दलील पर दलील देनी पड़ती है . फिर भी सामने खड़ा व्यक्तिवही सुनता है ,जो वह सुनना चाहता है .हम उसके अभेद कानों के पार जाना चाहते हैं .उतर जाना चाहते हैंउसके मस्तिष्क पटल पर बजाय ये सोचे

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जीवन एक संगीत है-आभा सिंह

हिंदी कविता

जीवन एक संगीत है-आभा सिंह जीवन एक संगीत है इसको गुनगुनाइए लाखों उलझनें हो मगर हँसकर सुलझाइए कमल कीचड़ में भी रहकर अपनी सुन्दरता ना खोतागुलाब काँटों में भी रहकर मुस्कुराना ना भूलतादामन से काँटे चुन-चुनकर जीवन को सफल बनाइएजीवन एक संगीत है इसको गुनगुनाइए !! अंगारों से भरी राहों से गुज़रकर उँचाइयों पर पहुंचिएअंधेरों

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मुखौटा पर कविता

हिंदी कविता

मुखौटा पर कविता हां!मैं मुखौटा।मेरी ओट मेंमुंह जो होता।अंदर से रोकरबाहर हंसाता भी हूं।कभी कभीहोली के हुड़दंग में,बच्चों कोडराता भी हूं।मैंछुपा लेता हूं।मुखड़े की मक्कारियां।आंखों की होश्यारियां।और दिल की उद्गारियां।।दो मुंहे सांपों काएक चेहरामेरा ही तो है।मैं हीसामने वालीनजरों के लिएधोखा हूं।और खुद सामने वाले की नज़रो सेबचने का मौका हूं।हां..हां मैं ही मुखौटा हूं।।

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