परिवार की खातिर ( कविता ) by neha sharma
हिंदी कवितामेरी की कविता में एक गरीब परिवार की दशा का चित्रांकन किया गया है
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मेरी की कविता में एक गरीब परिवार की दशा का चित्रांकन किया गया है
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हाय यह क्या हो गया? हाय यह क्या हो गया?महाभारत हो गया ।हुआ कैसे?एकमात्र दुर्योधन से!किसका बेटा ?अंधे धृतराष्ट्र का!पट्टी लगाई आंखों मेंपतिव्रता गांधारी का।शायद कम गई दृष्टि इनकी,उद्दंडता जो दुर्योधन ने की । असल कसूरवार कौन?जिसने दुर्योधन को गढ़ा।जीवन के महत्वपूर्ण घड़ियों में ,जो सारे बुरे सबक को पढ़ा ।दोषी वे सारे व्यवस्था हैं
हाय यह क्या हो गया?- मनीभाई नवरत्न Read More »
प्रेरणा दायक कविता – आगे बढ़े चलेंगे यदि रक्त बूंद भर भी होगा कहीं बदन में,नस एक भी फड़कती होगी समस्त तन में,यदि एक भी रहेगी बाकी तरंग मन में,हर एक साँस पर हम आगे बढ़े चलेंगे। वह लक्ष्य सामने है, पीछे नहीं चलेंग।मंजिल बहुत बड़ी है पर शाम ढल रही है,सरिता मुखीवों की आगे
प्रेरणा दायक कविता – आगे बढ़े चलेंगे Read More »
मजदूर विश्व निर्माता है। संसार में उसके बिना विकास कार्य संभव नहीं है। मजदूर श्रम के पुजारी है। उन्हें मेरा नमन है।
आखिर हम मजदूर है- कविता, महदीप जंघेल Read More »
इस रचना के माध्यम से कवि परिवार की महिमा को व्यक्त कर रहा है |
परिवार – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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परिवार के बिना इंसान का कोई वजूद नही है।
हर मनुष्य परिवार के लिए ही जीता और मरता है।
परिवार में मिलजुलकर रहने से हर कार्य सरलता से संपन्न हो जाता है।
परिवार का महत्व- कविता महदीप जंघेल Read More »
प्रेरणा दायक कविता – आज चुकाना है ऋण तुमको अपनी माँ के प्यार का उठो, साथियो ! समय नहीं है बहशोभा-अंगार का।आज चुकाना है ऋण तुमको अपनी माँ के प्यार का॥ प्राण हथेली पर रख-रखकर, चलना है मैदान में।फर्क नहीं आने देना है देश, जाति की शान में।सबके आगे एक प्रश्न है सीमा के अधिकार
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बुरे वक्त में हमारा धैर्य और आत्मविश्वास हमे संबल प्रदान करती है।
अतः आपातकाल में भी टूटना नही है। वक्त महान होता है।
बुरा वक्त भी गुजर जाएगा,कविता, महदीप जंघेल
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प्रेरणा दायक कविता – तुझको विजय-पराजय से क्या? चल तू अपनी राह पथिक चल, तुझको विजय-पराजय से क्या?होने दे होता है जो कुछ, उस होने का फिर निर्णय क्या? भँवर उठ रहे हैं सागर में, मेघ उमड़ते हैं अम्बर में।आँधी और तूफान डगर में।तुझको तो केवल चलना है, चलना ही है तो फिर भय क्या?तुझको
प्रेरणा दायक कविता – तुझको विजय-पराजय से क्या? Read More »
यह रचना उल्लाला छंद है जो अंतः प्रेरणा से संबंधित है।
कवयित्री पद्मा साहू “पर्वणी”
खैरागढ़ छत्तीसगढ़
अंतः प्रेरणा कविता Read More »
कर्तव्य-बोध -रामनरेश त्रिपाठी जिस पर गिरकर उदर-दरी से तुमने जन्म लिया है।जिसका खाकर अन्न सुधा सम नीर समीर पिया है। जिस पर खड़े हुए, खेले, घर बना बसे, सुख पाए।जिसका रूप विलोक तुम्हारे दृग, मन, प्राण जुड़ाए॥ वह स्नेह की मूर्ति दयामयि माता तुल्य मही है।उसके प्रति कर्त्तव्य तुम्हारा क्या कुछ शेष नहीं है।हाथ पकड़कर
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