बदरी – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
प्रकृति और पर्यावरणइस रचना में बादलों की महिमा का वर्णन मिलता है |
बदरी – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस रचना में बादलों की महिमा का वर्णन मिलता है |
बदरी – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस कविता में कवि सभी से सत्य पर्ग पर चलने को प्रेरित कर रहा है |
सत्य मार्ग तेरी डगर हो – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस कविता में कवि बच्चों की सकारात्मक सोच को सलाम करता है |
छू लेंगे हम आसमान- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस रचना के माध्यम से कवि आदर्श स्थापित करने और स्वयं के प्रयास से लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रेरित कर रहा है |
पाना है तुमको आसमान जमीं पर- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस रचना में कवि एक ऐसे बालक को अपनी कविता का पात्र बना रहा है जो अभावों में जीता है साथ ही स्वयं को प्रेरित करता रहता है |
वह अनाथ बालक- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस रचना को श्री कृष्ण की भक्ति के रूप में भजन के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है |
बोलो रे बोलो बोलो राधे गोपाल बोलो- आरती – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस रचना में कवि एक वीर सैनिक की माँ की भावनाओं को व्यक्त कर रहा है जो अपनी माँ से कहकर गया था कि वो युद्ध जीतकर वापस लौटेगा किन्तु…….|
मातृभूमि- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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इस रचना में कवि नए – नए विषयों से स्वयं को अभिभूत महसूस कर रहा है साथ ही समाज में फ़ैल रहे असामाजिक विचारों पर कटाक्ष कर रहा है |
कवि पंख हुए विस्तृत – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
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मनोज्ञा छंद “होली” रचयिता बासुदेव अग्रवाल।
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pani ke mahatav ko samjhane ka prayas
२२ मार्च विश्व जल दिवस – प्रिया शर्मा Read More »
इंसान को हैसियत को समझ कर ही कार्य करना चाहिए
चादर जितने पांव पसारो घर घर की कहानी
चादर जितने पांव पसारो – राकेश सक्सेना Read More »