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हिन्दी दोहा – वायु पर दोहे
कभी कैंसर हो न किसी को
मेरा सपना सबकी खैर
सबसे प्यारा मेरा देश
जीवन में अनमोल है जल
कहाँ बचे हैं गाँव
थके हुए हैं पाँव दूर बहुत है गाँव
चटक लाल रोली कपाल
खिली गुनगुनी धूप
वीणा वादिनी नमन आपको प्रणाम है
वाणी वंदना : माँ वाणी अभिनंदन तेरा
जय गणपति जय पार्वती सुत- गणेश स्तुति
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