कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

धन्य वही धन जो करे आत्म-जगत् कल्याण

हिंदी कविता

धन्य वही धन जो करे आत्म-जगत् कल्याण धन्य वही धन जो करे, आत्म-जगत् कल्याण।करे कामना धर्म की,मिले मधुर निर्वाण। संग्रह केवल वस्तु का,विग्रह से अनुबंध।सुविचारों की संपदा,से संभव संबंध।। धन-दौलत के साथ ही,बढ़ता क्यों अपराध।कठिन दंड भी शांति को,कहाँ सका है साध।। शिक्षा,जब माना गया,केवल भौतिक ज्ञान।मानव-मूल्यों के बिना,दुखद भ्राँत उत्थान।। निधन हुआ धन से […]

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सिद्धिविनायक गणेश वंदना

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सिद्धिविनायक गणेश वंदना सिद्धिविनायक देव हो,तुझे मनाऊँ आज।माँ गौरी शंकर सुवन,हो पूरण मम काज।। प्रथम पुज्य गणराज जी, बुद्धि विधाता नाथ।कष्ट हरो गणनायका,चरण  झुकाऊँ माथ।। मातु पिता करि परिक्रमा,सजते देव प्रधान।बुद्धि विनायक हैं कहे,कृपा करो भगवान ।। मोदक प्रिय गौरी तनय,एक दंत अखिलेश।हाथ जोड़ विनती करूँ, करो दया करुनेश।। रिद्धि सिद्धि को साथ ले, आओ

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तिजा उपास (हास्य कविता)

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

तिजा उपास (हास्य कविता) तिजा उपास रहे बर, काल करू भात खाय हे ।बिहना ले दरपन ला संगवारी बनाय हे।। 1 क‌ई किसीम रोटी पीठा झटपट बनात हे ।उठ उठ के आत हे, लस ले सुत जात हे।। 2 ल‌इका मन रोटी के,सुगंध ला पात हे ।सुंग सुंग ल‌इका मन चुलहा तीर जात हे।। 3

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तोड़े हुए रंग-बिरंगे फूल :नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

नारी जीवन और संवेदना

तोड़े हुए रंग-बिरंगे फूल टीप-टीप बरसता पानीछतरी ओढ़ेसुबह-सुबह चहलकदमी करतेघर से दूर सड़कों तक जा निकलादेखा–सड़क के किनारेलगे हैं फूलदार पौधे कईपौधों पर निकली हैं कलियाँ कईमग़र कहीं भीदूर-दूर तक पौधों परखिले हुए फूल एक भी नहींसहसा नजरें गईनहाए न धोएफूल चुन रहे पौधों सेमहिला-पुरुष कई-कईवही जो कहलाते आस्तिक जनरखे हुए हैं झिल्ली मेंतोड़े हुए

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हरिपदी छंद में गणेश वंदन

हिंदी कविता

गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक

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स्वभाव पर कविता

हिंदी कविता

स्वभाव पर कविता पचा लेता है विष,उसको सुधा में ढाल देता है,अँधेरा हो जहाँ दीपक जतन से बाल देता है । ये छोटी मछलियाँ हैं खैर ये कब तक मनायेंगी,बड़ी मछली के हाथों में शिकारी जाल देता है। अमन का हाल चीखें शाहराहों की बताती हैं,पहरेदार पर बचते हुए अहवाल देता है । न काटो

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विघटन पर कविता

हिंदी कविता

विघटन पर कविता विघटन की चलती क्रिया , मत होना हैरान ।नियम सतत् प्रारंभ है , शायद सब अंजान ।।शायद सब अंजान , बदलते  गौर करो तुम ।आज अभी जो प्राप्त , रहे कल होकर ही गुम ।।कह ननकी कवि तुच्छ , चिन्ह रहते हैं उपटन ।कर जाता है काम , समय पर आकर विघटन

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मूर्ख कहते हैं सभी

हिंदी कविता

मूर्ख कहते हैं सभी मूर्ख कहते हैं सभी,उसका सरल व्यवहार है,ज्ञान वालों से जटिल सा हो गया संसार है। शब्द-शिल्पी,छंद-ज्ञाता,अलंकारों के प्रभो!क्या जटिल संवाद से ही काव्य का श्रृंगार है? जो नपुंसक हैं प्रलय का शोर करते फिर रहे,नव सृजन तो नित्य ही पुरुषत्व का उद्गार है। द्वेष रूपी खड्ग से क्या द्वेष का वध हो

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अनुभूति भाव पर कविता

हिंदी कविता

अनुभूति भाव पर कविता दृश्य देख अनुभूति से ,             आया अब विश्वास ।अपने उन्नति के लिए ,             लोग करे ठग रास ।। जिसका अनुभव है तुझे ,              करो वही तुम कृत्य ।तुझमें प्रतिभा है भरी ,       

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भाषा बड़ी है प्यारी -बासुदेव अग्रवाल नमन

हिंदी कविता

भाषा बड़ी है प्यारी भाषा बड़ी है प्यारी, जग में अनोखी हिन्दी,चन्दा के जैसे  सोहे, नभ में निराली हिन्दी। इसके लहू में संस्कृत, थाती बड़ी है पावन,ये सूर, तुलसी, मीरा, की है बसाई हिन्दी। पहचान हमको देती, सबसे अलग ये जग में,मीठी  जगत में सबसे, रस की पिटारी हिन्दी। हर श्वास में ये बसती, हर

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अरे लकीर के फकीरों

हिंदी कविता

अरे लकीर के फकीरों अपने-अपने मुहावरों परवे और तुमजिते आ रहे हो सदियों सेमुहावरा कभी बदला ही नहींन उनका न तुम्हारा शासक हैं वेबागडोर है उनके हाथों मेंवे अपने मुहावरों पररहते हैं सदा कायम तुम्हारे लिएवे जो भी कहते हैंकभी नहीं बदलतेचाहे जो हश्र हो तुम्हारावे अपने मुहावरों के पक्के हैं एक बार कह देने

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