कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

हिन्दी कविता: अब तो पाठ पढ़ाना है

हिंदी कविता

अब तो पाठ पढ़ाना है
★★★★★★★★★
फिर सीमा में आ जाए तो,
गलवान को याद दिलाना है।
दुस्साहस कर न सके वह,
ऐसी सबक सिखाना है।
ए वीर जवानों सुन लो,
सबको यह बताना है।
कब तक चीनी विष घोलेंगे,
अब तो पाठ पढ़ाना है।
प्राण जाय पर वचन न जाय,
ऐसी कसम जो खाना है।
थर थर काँप उठे रूह उनका,
ऐसी सजा दिलाना है।
कलाम की परमाणु याद दिला दो,
बासठ का अब नही जमाना है।
कब तक चीनी विष घोलेंगे,
अब तो पाठ पढ़ाना है।
★★★★★★★★★★★★
रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822

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dr bhimrao ambedkar

भीम बाबा पर कविता

समाज और यथार्थ

भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे।[1] उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। भीम बाबा पर कविता

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अलविदा मेरे चाहने वाले-कमल यशवंत सिन्हा ‘तिलसमानी’

हिंदी कविता

अलविदा मेरे चाहने वाले जब उसने ही छोड़ दिया मुझको मेरे हवालेतुम्हीं बताओ फिर मुझको कौन संभाले??? अब फिर किसी पे ऐतबार न होगाकरीब आने के चाहे कोई सौ तरकीब निकाले। जिसने खो दी अपने जीने की वजहउसे ख़्वाब दिखाते है ख़्वाब तोड़कर जाने वाले। भूख ,नींद, प्यास सब छीन कर वो कहते हैख्याल रखना

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shri Krishna

गीता ग्रंथ है पवित्र पावन- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

गीता ग्रंथ में उल्लेखित महत्वपूर्ण बातों को आधार मानकर लिखी गई कविता

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नज़्म – मुझे समझा रही थी वो

हिंदी कविता

मुझे समझा रही थी वो बहुत मासूम लहजे में, बड़े नाज़ुक तरीके सेमेरे गालों पे रखके हाथ समझाया था उसने येसुनो इक बात मानोगे,अगर मुझसे है तुमको प्यार,तो इक एहसान कर देनाजो मुश्किल है,मेरी ख़ातिर उसे आसान कर देना…अब इसके बाद दोबारा मुझे न याद आना तुमअगर ये हो सके तो जान मुझको भूल जाना

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नारी पर दोहे- डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”

नारी जीवन और संवेदना, हिंदी कविता

नारी पर दोहे ★★★★नारी की यशगान हो ,नारी की ही रूप ।नारी के सहयोग से,मिलते लक्ष्य अनुप।। नारी बिन कब पूर्ण है?एक सुखी परिवार।नारी जो सुरभित रहे, सुखी रहे संसार।। जग में जो करता नहीं , नारी का सम्मान।कहलाये वह क्यो मनुज ,वह है पशु समान।।★★★★★★★★★★★★★रचनाकार – डिजेन्द्र कुर्रे”कोहिनूर”

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