वह नूर पहचाना नहीं/ रेखराम साहू
हिंदी कवितावह नूर पहचाना नहीं/ रेखराम साहू क्या ख़ुदा की बात,अपने आप को जाना नहींं।साँच है महदूद,मेरी सोच तक माना नहीं ।। ज़िंदगी हँसकर,रुलाकर मौत यह समझा गईं।दुश्मनी है ना किसी से और याराना नहीं।। यह हवस की राह राहत से रही अंजान है।दौड़ना-चलना मग़र मंज़िल कभी पाना नहीं।। हाय होती है ग़रीबों की हमेशा आतिशी।राख़ […]
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