कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

Hindi Poem ( KAVITA BAHAR)

वह नूर पहचाना नहीं/ रेखराम साहू

हिंदी कविता

वह नूर पहचाना नहीं/ रेखराम साहू क्या ख़ुदा की बात,अपने आप को जाना नहींं।साँच है महदूद,मेरी सोच तक माना नहीं ।। ज़िंदगी हँसकर,रुलाकर मौत यह समझा गईं।दुश्मनी है ना किसी से और याराना नहीं।। यह हवस की राह राहत से रही अंजान है।दौड़ना-चलना मग़र मंज़िल कभी पाना नहीं।। हाय होती है ग़रीबों की हमेशा आतिशी।राख़ […]

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radha shyam sri krishna

क्यों? प्रीत बढ़ाई कान्हा से

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क्यों? प्रीत बढ़ाई कान्हा से झलकत, नैनन की गगरियाँ,झलक उठे, अश्रु – धार,क्यों? प्रीत बढ़ाई कान्हा से,बेहिन्तहा, होकर बेकरार! तड़पत – तड़पत हुई मै बावरी,ज्यों तड़पत जल बिन मछली,कब दर्शन दोगे घनश्याम,बिन तेरे अँखियाँ अकुलांई! क्यों? प्रीत बढ़ाई कान्हा से, बेहिन्तहा, होकर बेकरार,! मुझे अपनी बाँसुरियाँ बना लौ,वर्ना, प्रीत मोहे डस लेगी,दरसन मै, तेरे, बाँसुरियाँ

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goverdhan shri krishna

मीत बना कर लो रख हे गिरधारी/गीता द्विवेदी

हिंदी कविता

मीत बना कर लो रख हे गिरधारी (1) आकर देख जरा अब हालत मैं दुखिया बन बाट निहारी।श्यामल रूप रिझा मन मीत बना कर लो रख हे गिरधारी।काजल नैन नहीं टिकता गजरा बिखरे कब कौन सँवारी।चाह घनेर भयो विधि लेखन टारन को अड़ते बनवारी।। (2) कातर भाव पुकार रही हिरणी प्रभु आकर प्राण बचाओ।नाहर घेर

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goverdhan shri krishna

मेरे गिरधर, मेरे कन्हाई जी / रचयिता:-डी कुमार–अजस्र

हिंदी कविता

प्रस्तुत गीत या गेय कविता/भजन —- मेरे गिरधर, मेरे कन्हाई जी —डी कुमार–अजस्र द्वारा स्वरचित गीत या भजन के रूप में सृजित है ।

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goverdhan shri krishna

गोकुल में कृष्ण जन्मोत्सव – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

गोकुल में कृष्ण जन्मोत्सव                      जन्म  उत्सव मोहन का,  देखन देव महान।भेष  बदल  यादव  बनें  ,यशोदा के मकान ।। सब  देवों  की नारियाँ ,ले मन  पावन  प्रीत। बनी  रूप  तज  गोपियाँ ,गाती  मंगल गीत।। रमे   मुरारी   प्रेम   में , बैठे   शम्भु   उदास।चलो नाथ गोकुल चलें,कहीं सती आ पास।। शम्भु  मदारी  बन  गये , डमरू लेकर  हाथ।गोकुल 

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radha shyam sri krishna

तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा-केवरा यदु “मीरा “

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तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा ।आओ कन्हाई आओ कन्हाईतुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा—- कान्हा तूने राधा से प्रीत लगाकरभूले हो कैसे मोहन मथुरा में जाकर ।गोकुल की गलियों में फिरती है बावरी सीतन की सुध बिसराई कृष्णा कृष्णा कृष्णा हो कान्हा ।।तुझ संग प्रीत लगाई कृष्णा

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shri Krishna

नटखट नंद किशोर- नीरामणी श्रीवास

हिंदी कविता

नटखट नंद किशोर चोरी करके छुप गया , नटखट नंद किशोर ।सभी गोपियाँ ढूँढती , प्यारा माखन चोर ।।प्यारा माखन चोर , शिकायत माँ से करते ।दधि की मटकी फोड़ , चैन हम सबकी हरते ।।नियति कहे कर जोड़ , अनूठी लीला तोरी ।प्रेम भक्ति की मान , बचाने करते चोरी ।। चोरी करते देखकर

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radha shyam sri krishna

राधा और श्याम की प्रेम कविता

हिंदी कविता

राधा और श्याम की प्रेम कविता तू मेरी राधा मैं तेरा श्याम हूं।तुमसे प्रेम करके मैं बदनाम हूं। तुझे देखें बिन ,मेरी जीवन की बांसुरी में सूर कहां? तू है मेरे साथ तो सुंदर लगता है,यह सारा जहां। बस तेरी ही धुन में रमे रहूं बस दिन रात तेरा नाम लूं। तू मेरी राधा मैं

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shri Krishna

हो मुरलिया रे / केवरा यदु “मीरा”

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हो मुरलिया रे / केवरा यदु “मीरा” हो मुरलिया रे तँय का का  दान पुन करे हस।तँय का का दान पुन करे हस।तोर बिना राहय नहीं कान्हा ओकरे संग धरे हस।तँय का का दान पुन करे हस।। सुन रे मुरलिया तोर भाग जबर हे कान्हा के संग रहिथस।मोहना के हिरदय के बात ला अपने धुन

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shri Krishna

कृष्ण पर आधारित कविता -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

कृष्ण पर आधारित कविता -मनीभाई नवरत्न हे कृष्ण !आप सर्वत्र।फिर भी खोजता हूँ;अगर कहूं आप पूर्ण हो ।तो सत्य भी हो जायेगा असत्य।चूंकि मैं अपूर्ण जो ठहरा । हे द्वारकाधीश !संसार रूपी कुरुक्षेत्र के नायक !संघर्ष में जन्मे ,खतरों में पलेतथापि बाल लीलाएँ,बताती जीवन के मायने।पर्वत उठाना,कालिया मर्दनकंस रूपी काल को पछाड़नाउसी की नगरी में

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shri Krishna

कृष्ण रासलीला

नारी जीवन और संवेदना

कृष्ण रासलीला लीला राधे कृष्ण सम,आँख उठा के देख।लाख कोटि महा शंख में,लख लीला है एक।। सब देवों की नारियाँ,कर नित साज सिंगार।गमन करें शुचि रास में ,बन ठन हो तैयार।। कृष्णप्रेम विह्वल शम्भु,निज मन कियो विचार।राधे कृष्ण प्रेम परम ,जा देखूँ इक बार।। शिव गौरा से जा तभी,कहने लगे सकुचाय।रास लखन मै भी चलूँ

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