आकृति की तलाश पर कविता
हिंदी कविताआकृति की तलाश पर कविता मुझे कहते हैंजमाने वालेएक निराकारप्राणीपर/मैं क्या करूंमुझे तोमेरीआकृति की तलाश है
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आकृति की तलाश पर कविता मुझे कहते हैंजमाने वालेएक निराकारप्राणीपर/मैं क्या करूंमुझे तोमेरीआकृति की तलाश है
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शबनम पर कविता शबनम की चमकहमारे तुम्हारेमधुर रिश्तों की गंधलिए होती हैमानो तोये सच हैगर न मानों तोये ही शबनमपानी का कतरामात्र होती है।।।
संघर्ष पर कविता -संघर्ष का प्रतिफल मुझे मेरीसंघर्ष गाथा सेबेहद लगाव हैप्यार हैवोइसलिए किमैं वर्तमान मेंजो कुछ भी हूंवोमेरे संघर्ष काही प्रतिफल हैसंघर्ष के कारण हीमुझे समाज मेंशान से जीने काहक प्राप्त हुआ।। मनोज बाथरे
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उम्मीद के दिये पर कविता अपनेपन मेंखोये हुएहम खोजते हैंउम्मीद के दियेजो हमेंआशारूपीउजालेके साथ हमेंएक नई रोशनीदे सकेंअपने सुखदजीवन के लिए
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संबंध पर कविता संबंध सिर्फहमें अपनों सेजोड़ने वालीकड़ी कानाम नहीं हैये तोवो संबंध हैजो सदैवहमारे बीचएक सेतु सा कार्यकरता हैअनेक संबंधों के लिए।।
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नास्तिक पर कविता नास्तिक हीपैदा हुआ था मैंबाकी भीहोते हैं पैदा नास्तिक हीमानव मूल रूप मेंहोता है नास्तिक नाना प्रकार केप्रपंच करके उसेबनाया जाता है आस्तिककितना आसान है आस्तिक होनाबिना जाने मानना हैबिना तर्क किए मानना हैकिसी को नकारने के लिएचिंतन-मनन, तर्क-वितर्कअनुसंधान करना पड़ता है भले कितना ही दिखावा करेंआस्तिक होने काधर्म स्थलों के प्रभारीहोते
सबसे बड़ा प्रैंकर : मनीभाई नवरत्न ये जो छूटती हैहंसी की झरने लबों से ।हो सकती है स्वास्थ्यवर्धक ,पर नहीं कह सकतेये फूटी होगी प्राकृतिक । पर इसमें दोष नहीं है ,अवतरण जो हुआ तेराऐसे भयानक कृत्रिम जग में। कभी-कभी सोचता हूँझूठा नहीं था प्लेटो।जो कहता था ये दुनिया मिथ्या है,उससे भी बनावटी यहाँ के
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सर्वश्रेष्ठता पर कविता एकअदना जीवबेबस कर दियाअसहाय-त्रस्त-सहमा मानव,छुप बैठा अपनों से बचकर,जो हर कोण ढाल से,अपनों सा दिखते हैं.लेकिन पहचान नहीं बताते आसानी से. अब उनमें वहीं नहींबल्कि कोई और भी है.जो जान पर तूला है.हाय! ये मानव कुछ तो भूला है.नहीं तो ये प्रकृति ,हमारी भी है मां.सच!उसे पता हैसंतुलन कैसे है रखना?परिवर्तन उसका
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सर्चिंग पर लघु कथा अज्ञात मुखबिर से पुलिस को सुचना मिली की सलवाजुडूम कार्यकर्ताओं पर फायरिंग करने वाले मुख्य अभियुक्त महिला नक्सली लौमन कोतरापाल में छुपी हुई हैं।नक्सल ऑपरेशन प्रमुख एस एस पी दयाराम ने टीम गठित कर सर्चिंग दल को कोतरापाल जाने का आदेश दिया।दयाराम भी दल के साथ जंगल की ओर कूच कर
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दोहे: -सच को सच जाने सच को सच जाने बिना,मुँह से कुछ मत बोल।सच आएगा सामने,बज जाएगा ढ़ोल।। सुनी सुनाई बात में,कुछ भी देते जोड़।रोके हम अफवाह को,जीवन के हर मोड़।। जात धर्म पे लड़ रहे,युग युग से इंसान।समझे जो खुद को बड़ा,इस जग में शैतान।। मानव मानव एक हैं,तन में हड्डी खून।मत करना तुम
सच को सच जाने-राजकिशोर धिरही Read More »
आम फल पर दोहे फल में राजा आम है,चाकू धर के काट।केसर देशी लंगड़ा,खाना इसको चाट।। कई किस्म है आम के,करता कफ को दूर।खास फायदा देह को,खाते इसको शूर।। पेट दर्द या गैस में,खाते हैं सब आम।फूल बीज फल छाल भी,करता औषधि काम।। पी लेना रस आम का,स्वस्थ रहेगा देह।खा लेना गुठली गिरी,दूर करे मधुमेह।।
उपदेश पर कविता सोच रहें हैं किहम कुछ उपदेशदे सबकोपर कैसेक्या हमारा उपदेशकोई शिरोधार्य करेगाक्योंकि पर उपदेशदेने से पहलेहमें स्वयं उनकोअपनाना होगातब कहीं जाकरउपदेश कीसार्थकता सफल होगी।।
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