कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

तुम्हारे होने का अहसास

हिंदी कविता

तुम्हारे होने का अहसास तुम आसपास नहीं होतेमगर आसपास होते हैंतम्हारे होने का अहसासमन -मस्तिष्क में संचिततुम्हारी आवाजतुम्हारी छविअक़्सरहूबहूवैसी-हीबाहर सुनाई देती हैदिखाई देती हैतत्क्षणतुम्हारे होने के अहसास से भर जाता हूँधड़क जाता हूँकई बार खिड़की के पर्दे हटाकरबाहर देखने लग जाता हूँयह सच है कि तुम नहीं होतेपरपलभर के लिएतुम्हारे होने जैसा लग जाता हैलोगों ने बतायायह अमूमन सब के

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हाइकु

सुकमोती चौहान के हाइकु

हिंदी कविता

सुकमोती चौहान के हाइकु पितर पाख~पति की तस्वीर मेंफूलों की माला। पूस की रात~भुट्टे भून रही हैअलाव में माँ। श्मशान घाट~कुत्ते के भौंकने सेसहमा रामू। श्रृंगार पेटी~गौरैया नोंचे देखशीशा में छवि। गौरैया झुँड़चुग रहे हैं दाने~धूप सुगंध। पीपल पातखा रही बकरियाँ~वृक ताक में। गौ टीले पर~शेरनी के मुँह मेंबछड़ा ग्रीवा। मयूर नृत्य~मोबाइल देखतेबच्चों की टोली।

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बेटी की पुकार

नारी जीवन और संवेदना

      बेटी की पुकार पिता का मैं ख्याल रखूंगीतेरे कहे अनुसार मैं चलूंगीरूखी सूखी ही मैं खा लूंगीमत मार मुझे सुन मेरी मांमुझे धरा पर आने तो दे।।बोझ मैं तुमपर नहीं बनूंगीपढ़ लिख कर बड़ा बनूंगीतेरा मैं नाम रोशन करुंगीमत मार मुझे सुन मेरी मांमुझे  धरा पर आने तो दे।।खिलती हुई नन्ही कली

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संकल्प कविता

हिंदी कविता

संकल्प मेरी अंजुरी में भरे,जुगनू से चमकते,कुछ अक्षर हैं!जो अकुलाते हैं,छटपटाते हैं!सकुचाते हुए कहते हैं-एकाग्र चित्त होकर,अब ध्यान धरो!भीतर की शांति सेकोलाहल कम करो!अंतर के तम को मिटाकर,दिव्य प्रकाश भरो!झंझोड़ कर जगाओ,सोयी हुई मानवता को,भटकते राहगीरों कोसही दिशा दिखाओ!बुद्धत्व का बोध करोकुछ करो,कुछ तो करो!शब्दों की चुभन से,सचेत,सजग हुई मैं,फिर लिया संकल्प!कुछ करना होगा! कुछ

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हिन्दी हमारी शान – भुवन बिष्ट

हिंदी कविता

हिन्दी हमारी शान हिन्दी न केवल बोली भाषा,                         ये हमारी शान है।मातृभाषा  है  हमारी,                           ये बड़ी महान है।।…….. चमकते तारे आसमां के ,                       

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मुझे अभी नहीं सोना है

मन और भावनाएँ

मुझे अभी नहीं सोना है मुझे अभी नहीं सोना है। जब तक थक कर चूर न हो जाऊँ, भावनाओं का बोझ ढोना है। मुझे अभी नहीं सोना है। ख्वाब जब तक न हों पूरे, मैंने ही बंदिशें लगायीं खुद पेख्वाब देखने पर।। घटाटोप अँधेरा परये झींगुर के शोरकहते हैं कुछ तो । शायद बुझाने को कहतेआँखों के दीये। पर इन कूप्पियों में

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प्रश्न है अब आन का-प्रवीण त्रिपाठी

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

प्रश्न है अब आन का हर  प्रगति  के  मूल में  स्थान  है  विज्ञान का।खोज करता नित्य जो उपयोग करके ज्ञान का।1 रात दिन वो जूझते भारत कभी पीछे न हो।देश जे हित काम करके ध्यान रखते मान का।2 टोलियाँ वैज्ञानिकों की खोज करतीं नित नयी।राष्ट्र करता है प्रशंसा उनके नए अवदान का।3 भूलकर परिवार जो

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प्रसन्न रहे मेरी मां भारती -रश्मिअग्निहोत्री

हिंदी कविता

प्रसन्न रहे मेरी मां भारती हे गणपति ! गणराज, गणनायक,विघ्नहर्ता वरदाता, मंगल दायक।अष्ट  सिद्धि, नव  निधि  के दाता, आए शरण, राखो लाज विधाता। हे  शंकर  सु्वन,  भवानी  नंदन,रिद्धि  देना  और  सिद्धि   देना।कोमल बुद्धि देना हर सकू संताप जगत के आप मुझे प्रसिद्धि देना। मोह  माया  से  चित को दूर रखूं ,प्रभु  मुझको  ऐसी  शक्ति  देना।कुटुंबियों पर स्नेह

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इतिहास बनाना आदत है -रश्मि अग्निहोत्री

हिंदी कविता

इतिहास बनाना आदत है इतिहास   बनाना  आदत  है,परिश्रम इसरो की इबादत है!संकल्प  और  गहरा  हुआ है,दो कदम पर मंजिल अपनी है! क्योंकि, चंद्रयान 2 सफल है,हर  हिंदुस्तानी  के  दिल  में!बचपन से  चांद  को देखा है,अब पाने की हसरत जागी है! “रश्मि “क्योंकि  चंद्र की  दूरी, चंद्रयान २ से ज्यादा दूर नहीं! फिर हौसलों की उड़ान भरेंगे,जो न

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जिंदगी में अच्छा दोस्त किताब है -डीजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर

हिंदी कविता

जिंदगी में अच्छा दोस्त किताब है “ हर जिज्ञासु के मन में पाने की चाह है,मंजिल तक पहुंचाने का यही एक राह है। नया करने का इनमे बनता ख़्वाब है,जिंदगी में सबसे अच्छा दोस्त किताब है। इसी में कबीर के दोहे एवं संतों की वाणी है,इसी मेंअच्छी कविता एवं अच्छी कहानी है। किताब ज्ञान का

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है नमन देश की माटी को -राजेश पाण्डेय अब्र

हिंदी कविता

है नमन देश की माटी को विश्वजीत है स्वंत तिरंगा तीन रंगों की अमृत गंगासरफ़रोश होता हर जन मन मत लेना तुम इससे पंगा, ऊर्ज समाहित सैन्य बलों में जन,  धन लेकर खड़े पलों मेंऊर्जा  का  संचार  देश  मेंप्रश्न खड़े अनुत्तरित हलों में, सबल करे नेतृत्व देश का अभिमानी हो नहीं द्वेष कावक़्त पड़े सर कलम

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प्रेम का सागर है माँ – सुन्दर लाल डडसेना मधुर

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। प्रेम का सागर है माँ ममता की मूरत,प्रेम का सागर है माँ।सब कुछ धारण करे,ऐसा गागर है माँ।घर घर

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