पर्यावरण दूषित हुआ जाग रे मनुज जाग/सुधा शर्मा
प्रकृति और पर्यावरणपर्यावरण दूषित हुआ जाग रे मनुज जाग/सुधा शर्मा धानी चुनरी जो पहन,करे हरित श्रृंगार।आज रूप कुरूप हुआ,धरा हुई बेजार।सूना सूना वन हुआ,विटप भये सब ठूंठ।आन पड़ा संकट विकट,प्रकृति गई है रूठ।। जंगल सभी उजाड़ कर,काट लिए खुद पाँव।पीड़ा में फिर तड़पकर, ढूंढ रहे हैं छाँव।।अनावृष्टि अतिवृष्टि है,कहीं प्रलय या आग।पर्यावरण दूषित हुआ,जाग रे मनुज जाग।।
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