दिल की बात जुबाँ पे अक्सर हम लाने से डरते हैं
हिंदी कवितादिल की बात जुबाँ पे अक्सर हम लाने से डरते हैं दिल की बात जुबाँ पे अक्सर हम लाने से डरते हैंकहने को तो हम कह जाएँ पर कहने से बचते हैं।दिल वालों की इस बस्ती में कौन किसी का अपना हैकहने को अपना कह जाएँ पर कहने से डरते हैं ।चाहत की बुनियाद पे
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