पीड़ाएँ
हिंदी कवितापीड़ाएँ पिंजरा चला छोड़ कर , पंछी अनंत दूर ।यादें ही अब शेष हैं , परिजन हैं बेनूर ।। आँसू से रिश्ता घना , आँखों ने ली जोड़ ।निर्मोही क्यों हो गये , ले गये सुख निचोड़ ।।गहनें सिसक रहे सजन , रूठे सब श्रृंगार ।माथे की ये बिंदिया , पोंछ गये दिलदार ।। मन



