कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

कीमती या सिर्फ़ कमज़ोर?

हिंदी कविता

Valuable or Merely Vulnerable?(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद) असुरक्षाकिसी रिश्ते केमूल्य का प्रमाण नहीं,वह सिर्फउसके अस्वस्थ होने कासंकेत है। जब तुमकिसी कोभींचकर पकड़ना चाहते हो,डरते होकि कहीं वह छूट न जाए—वहीं सेअसुरक्षा शुरू होती है। रिश्ताअगर इच्छा पर टिका है,तो वह हिलता रहेगा,क्योंकिइच्छास्वभाव से हीडरपोक होती है। अपने आप से पूछो—क्या तुमकिसी सेलाभ के लिए

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पहले उद्देश्य, बाद में व्यक्ति

हिंदी कविता

पहले उद्देश्य, बाद में व्यक्ति सबसे ज़रूरी प्रेमकिसी और के लिए नहीं,अपने भीतर कीमहानता के लिए होता है—निर्मम, अडिग,समझौतों से मुक्त। आज के समय मेंतुम्हें जीने के लिएकिसी व्यक्ति कीअनिवार्यता नहीं है।अर्थव्यवस्था तुम्हें पाल लेती है,व्यवस्थाएँ तुम्हें बचा लेती हैं,अस्पताल तुम्हें ठीक कर देते हैं,ऐप्स तुम्हारे लिएराशन तक ले आते हैं। तुम कमा सकते हो।तुम

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जीवन की सच्ची संगति :अकेलापन

हिंदी कविता

अकेलापनअकेले होने का नाम नहीं,यह तो भीतर की भीड़ है—जहाँ लोग नहीं,अपने ही विचारकंधे से कंधा मिलाकरखड़े रहते हैं। वह व्यक्ति अकेला हैजो अपने साथठीक नहीं है। उसके भीतरतुलनाएँ हैं,इच्छाएँ हैं,शिकायतें हैं,यादों का शोर है। दुनिया भले सामने हो,पर वहअपने ही दिमाग मेंघिरा हुआ है। अकेलापनखाली मेज़ नहीं,एक भरा हुआ रेस्तराँ है—जहाँ हर थालीबासी है,हर

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एकांत ही पहला गुरु है

हिंदी कविता

एकांत ही पहला गुरु है अकेलापनदुश्मन नहीं,पहला गुरु है—पर हमउससे लड़ते रहते हैं। हम अकेले नहीं होते,हम अकेले जन्म लेते हैं।जन्म के साथ हीअलगाव का बीजहममें बो दिया जाता है। शिशु रोता हैभूख से नहीं,दर्द से नहीं—सिर्फ इसलिएकि कोई पास नहीं है।माँ की उपस्थितिदूध से पहलेशांति बन जाती है। यही आदतबड़ी होकरअहंकार बन जाती है—एक

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लक्ष्मण रेखा के उस पार

समाज और यथार्थ

लक्ष्मण रेखा के उस पार(अतुकांत कविता) एक समय था—गलत कामअँधेरे में होते थे,पर अँधेरा हीशर्म का सबूत था। छिपनाइस बात की गवाही देता थाकि कहीं न कहींअभी नैतिकता ज़िंदा है,अभी आत्मापूरी तरह मरी नहीं है। तब समाजगलत को गलत कहने कासाहस तो रखता था,और अपराधीनज़र झुकाकर चलता था। अब—गलत कामखुले मंच पर हैं,तालियों के बीच,कैमरों

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रेड लाइट एरिया

समाज और यथार्थ

रेड लाइट एरिया(अतुकांत कविता) यहाँ रातदिन से पहले जाग जाती है,और उजालेशर्म से सिर झुका लेते हैं। लाल बत्तियाँसिर्फ संकेत नहीं,यहाँ रुकी हुई ज़िंदगियों कीधड़कन हैं। हर दरवाज़े के पीछेकोई कहानी है—किसी की मजबूरी,किसी का छल,किसी का अधूरा बचपन। यहाँ हँसीसीखकर ओढ़ी जाती है,और आँसूमेकअप में छिपा दिए जाते हैं। कोई माँ हैजो रोज़ अपने

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झूठे कर्तव्यों का बोझ

समाज और यथार्थ

झूठे कर्तव्यों का बोझ अगर कर्तव्यकंधों पर पत्थर बन जाए,तो समझ लो—वह कभी तुम्हारा था ही नहीं।सच्चा उत्तरदायित्वझुकाता नहीं,ऊँचा उठाता है। अधिकतर लोगजिसे “ज़िम्मेदारी” कहते हैं,वह दरअसलउधार लिया हुआ आदेश है।पूछो उनसे—तुम्हें कैसे पताकि यही तुम्हारा कर्तव्य है?उत्तर मेंबस एक खाली निगाह मिलेगी। “मुझे सफल होना ही चाहिए—यह मेरी ज़िम्मेदारी है।”“मुझे शानदार करियर बनाना है।”“मुझे

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टाई में बँधा जंगल

मन और भावनाएँ

टाई में बँधा जंगल शिक्षा क्या है?रोटी कमाने की तरकीबयाऐसा जीवन गढ़ने की कलाजो जीने योग्य हो? एक बात मेंजानवर हमसे बेहतर रहे—उन्हेंअपने होने का बोझ नहीं ढोना पड़ता।न आत्मचेतना का जाल,न आत्मविनाश की योजनाएँ।वे सीधे हैं,सरल हैं,और अपने जंगल मेंईमानदार हैं। मनुष्य भीएक जानवर ही जन्म लेता है,पर उसे मिलाएक खतरनाक उपहार—ऊपर उठने की

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एक विशाल रसोई — जिसका नाम जीवन है

हिंदी कविता

एक विशाल रसोई — जिसका नाम जीवन है छोटी-छोटी बातें—कैसे जीवन की विशालताखा जाती हैं।आँख में पड़ाधूल का कणसूरज को भीढक देता है। पकाना,पकाना,पकाना।साफ़ करना,साफ़ करना,साफ़ करना।धोना,धोना,धोना।क्या सचमुचइसी के लिएतुम पैदा हुई थीं? तीन बच्चे—एक को जूते चाहिए,एक को अंडरवियर,पति को थर्मल।क्या यहीतुम्हारे अस्तित्व कामहान उद्देश्य है? छोटे के लिए चप्पल,बड़े के लिए बनियान,घर के

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पवित्र स्वार्थ

हिंदी कविता

पवित्र स्वार्थ सही के पक्ष मेंडटे रहना आसान नहीं होता—ख़ासकर तबजब अपना ही मनअपने ख़िलाफ़ विद्रोह कर दे। हम भीतर जो अव्यवस्था ढोते हैंवह आज की नहीं है।वह हमारे जन्म से पुरानी है,हमारी सोच से गहरी,हमारी परवरिश से भी पहले की।डर, लालच, ईर्ष्या, आसक्ति—ये निजी कमज़ोरियाँ नहीं,विकास की विरासत हैं,हर जीव को मिली हुईअंधेरी विरासत।

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उद्यमिता : पेशा नहीं, पुकार

हिंदी कविता

उद्यमिता : पेशा नहीं, पुकार पूछना चाहिए—जीवन क्या है?और किस बात सेवह जीने योग्य बनता है?या फिर उद्यमितासिर्फ़ तनख़्वाह से बड़ेअंकों का खेल है? तो तुम शुरुआत करना चाहते हो—ठीक है।पर पहलेखुद से झूठ बोलना बंद करो।बताओ,तुम वास्तव में क्या चाहते होऔर क्यों? अगर यह सफ़रसिर्फ़ अपनी छवि फुलाने के लिए है,मूल्यांकन के गुब्बारे उड़ाने

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न जुनून, न दबाव — बस प्रेम

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

न जुनून, न दबाव — बस प्रेम न जुनून की चिंगारी,न दबाव की बेड़ी,काम वहाँ से जन्म लेता हैजहाँ प्रेम चुपचाप बैठा होता है।हम कहते हैं—“पैशन फॉलो करो,”मानो जुनून कोई देवता हो,और विवेक उसका पुजारी।कोई बाज़ार के आगे झुकता है,कोई परिवार के डर से,और कोई अपने जुनून के नाम पर—तीनों अलग दिखते हैं,पर भीतर से

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