कीमती या सिर्फ़ कमज़ोर?

Valuable or Merely Vulnerable?
(अतुकांत हिंदी कविता – भावानुवाद)

असुरक्षा
किसी रिश्ते के
मूल्य का प्रमाण नहीं,
वह सिर्फ
उसके अस्वस्थ होने का
संकेत है।

जब तुम
किसी को
भींचकर पकड़ना चाहते हो,
डरते हो
कि कहीं वह छूट न जाए—
वहीं से
असुरक्षा शुरू होती है।

रिश्ता
अगर इच्छा पर टिका है,
तो वह हिलता रहेगा,
क्योंकि
इच्छा
स्वभाव से ही
डरपोक होती है।

अपने आप से पूछो—
क्या तुम
किसी से
लाभ के लिए जुड़े हो?
प्रतिष्ठा के लिए?
सुख के लिए?

अगर हाँ,
तो उस रिश्ते में
असल पदार्थ क्या है?
और जब पदार्थ ही नहीं,
तो सुरक्षित
तुम किसे करना चाहते हो?

जो सच में
मूल्यवान होता है,
उसमें
ताक़त होती है।
कमज़ोरी नहीं।

फिर यह
अजीब विरोधाभास क्यों—
एक तरफ़
हम कहते हैं
यह रिश्ता अनमोल है,
दूसरी तरफ़
उसे नाज़ुक बताते हैं।

अनमोल चीज़ें
मौसम से नहीं डरतीं,
मूड से नहीं टूटतीं,
परिस्थितियों से
डगमगाती नहीं।

और अगर कोई रिश्ता
इतना ही संवेदनशील है
कि ज़रा-सी हवा में
डोल जाए—
तो ईमानदारी से पूछो,
उसका मूल्य
आख़िर है क्या?

शायद
जो नाज़ुक है,
वह रिश्ता नहीं—
हमारी अपेक्षाएँ हैं।
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