कविता बहार

"कविता बहार" हिंदी कविता का लिखित संग्रह [ Collection of Hindi poems] है। जिसे भावी पीढ़ियों के लिए अमूल्य निधि के रूप में संजोया जा रहा है। कवियों के नाम, प्रतिष्ठा बनाये रखने के लिए कविता बहार प्रतिबद्ध है।

बीर/आल्ह छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

बीर/आल्ह छंद [सम मात्रिक] विधान – 31 मात्रा, 16,15 पर यति, चरणान्त में वाचिक भार 21 या गाल l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरणों पर तुकांत l उदाहरण :विनयशीलता बहुत दिखाते, लेकिन मन में भरा घमण्ड,तनिक चोट जो लगे अहम् को, पल में हो जाते उद्दण्ड। गुरुवर कहकर टाँग खींचते , देखे कितने ही […]

बीर/आल्ह छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें Read More »

केले पर कविता

हिंदी कविता

केले पर कविता सबसे प्यारा सबसे न्यारा मेरा नाम है बनाना। यूं तो हू मैं पीले रंग का सबका दिल हूं चुराता । आम, अनार, सेब, संतरेसबके स्वाद निराले। मैं जीता हूं बिना बीज के ऐसा हूं मैं अनोखा । कदली, केला, रंभा, भानूफलऊंचा लंबा मेरा कद। पूजा पाठ में करे इस्तेमालभोग भी लगे मेरे

केले पर कविता Read More »

कभी न तोड़ो कच्चे फल

हिंदी कविता

कभी न तोड़ो कच्चे फल बात पते की सुन लो मेरी,फल खाना है बहुत जरूरी।1। सुन्दर ,स्वस्थ,निरोग रहें हम,सारे सुख का भोग करें हम।2। आम,सन्तरा,काजू खाओ,बाबू,भोले,राजू आओ।3। प्रोटीन,विटामिन सब पाये,अनन्नास,अंगूर जो खाये ।4। कुछ मौसम कुछ बारहमासी,रखे,कटे मत खाओ बासी।5। जामुन,सेब,पपीता खाओ,पास डॉक्टर के मत जाओ।6। खरबूजा,तरबूज,अनार ,खा अमरूद न हो बीमार।7। बच्चों सुन लो

कभी न तोड़ो कच्चे फल Read More »

मुक्तामणि छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

मुक्तामणि छंद [सम मात्रिक] विधान – 25 मात्रा, 13,12 पर यति, यति से पहले वाचिक भार 12 या लगा, चरणान्त में वाचिक भार 22 या गागा l कुल चार चरण, क्रमागत दो-दो चरण तुकांत l विशेष – दोहा के क्रमागत दो चरणों के अंत में एक लघु बढ़ा देने से मुक्तामणि का एक चरण बनता

मुक्तामणि छंद [सम मात्रिक] कैसे लिखें Read More »

आम फल पर बाल कवितायेँ

हिंदी कविता

यहाँ पर आम फल पर 3 कवितायेँ प्रस्तुत हैं जो कि बाल कवितायेँ हैं नाम मेरा आम नाम मेरा आम है,हूं फिर भी खास।खाते मुझको जो,पा जाते है रास। रूप मेरे है अनेक,सबके मन भाता।देख देख मुझे सब,परमानंद को पाता। घर घर मेरी शाख,बनता हूं आचार।लू में सिरका बनूँ,दे शीतल बयार। खट्टे मीठे स्वाद है,मुह

आम फल पर बाल कवितायेँ Read More »

सोरठा छंद [अर्ध सम मात्रिक] कैसे लिखें

हिंदी कविता

सोरठा छंद [अर्ध सम मात्रिक] विधान – 11,13,11,13 मात्रा की चार चरण , सम चरणों के अंत में वाचिक भार 12 (अपवाद स्वरुप 12 2 भी), विषम चरणों के अंत में 21 अनिवार्य, सम चरणों के प्रारंभ में ‘मात्राक्रम 121 का स्वतंत्र शब्द’ वर्जित, विषम चरण तुकांत जबकि सम चरण अतुकांत l विशेष – दोहा

सोरठा छंद [अर्ध सम मात्रिक] कैसे लिखें Read More »

आम और तरबूजा बाल कविता

हिंदी कविता

आम और तरबूजा बाल कविता कहा आम तरबूजे सेसुन लो मेरी बातफलों का राजा आम मैंतेरी क्या औकातगांव शहर घर-घर में मेरीसबमें है पहचानबड़े शान से बच्चे बूढ़ेकरते खूब बखानअमृतफल फलश्रेष्ट अंबआम्र अनेकों नामलंगड़ा चौसा दशेहरीरूपों से संनामस्वादों में अनमोल मैमिलता बरहो मांसशादी लगन बरात मेंरहता हूं खुब खासकच्चा पक्का हूं उपयोगीसिरका बने आचारलू लगने

आम और तरबूजा बाल कविता Read More »

बहुत छोटे बच्चों के लिए कविता कैसी हो?

मन और भावनाएँ

छोटे बच्चों के लिए कविता बहुत छोटे बच्चों के लिए मनोरंजक कविता लिख लेना बड़े बच्चों के लिए कविता लिखने की अपेक्षा कहीं अधिक कठिन है। छोटे बच्चों का स्वभाव इतना चंचल और मनोभावनाएँ इतनी उलझी हुई होती हैं कि बड़े उन्हें प्रायः आसानी से समझ भी नहीं पाते। उन उलझी हुई भावनाओं में रमकर

बहुत छोटे बच्चों के लिए कविता कैसी हो? Read More »

खरबूज बाल कविता

हिंदी कविता

खरबूज बाल कविता हरे रंग खरबूज के,होते हैं ये गोलकाले-काले बीज भी,लगते हैं अनमोल।। करते हैं ये फायदे,पानी भी भरपूर।खाते सब खरबूज को,पूँजीपति मजदूर।। मीठे फल खरबूज के,उपज नदी मैदान।लाल-लाल होते गुदे,खाने में आसान।। नदियों के तट पर लगे,जहाँ बिछी हों रेत।खेती हों खरबूज की,रेत बने सुंदर खेत।। खाते जब खरबूज को,मिलता बढ़िया स्वाद।भर जाता

खरबूज बाल कविता Read More »

भूट्टे की भड़ास बाल कविता

हिंदी कविता

बाल कविता भूट्टे की भड़ास एक भूट्टा का मूंछ पका था,दूसरे भूट्टे का बाल काला।डंडा पकड़ के दोनों खड़े थे,रखवाली करता था लाला।। शर्म के मारे दोनों ओढ़े थे,हरे रंग का ओढ़नी दुशाला।ठंड के मौसम टपकती ओस,खूब पड भी रहा था पाला।। मारे ठंड के दोनों ही भूट्टे,मांगने लगे चाय का प्याला।चूल्हे की आग से

भूट्टे की भड़ास बाल कविता Read More »

नश्वर काया – दूजराम साहू अनन्य

हिंदी कविता

नश्वर काया – दूजराम साहू “अनन्य “ कर स्नान सज संवरकर ,पीहर को निकलते देखा । नूतन वसन किये धारण ,सुमन सना महकते देखा ।कुमकुम चंदन अबीर लगा ,कांधो पर चढ़ते देखा । कम नहीं सोहरत खजाना ,पर खाली हाथ जाते देखा ।गुमान था जिस तन का ,कब्र में उसे जाते देखा । कर जतन

नश्वर काया – दूजराम साहू अनन्य Read More »

Scroll to Top