बसंत ऋतु का नवगीत

बसंत ऋतु का नवगीत 🌿

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🎵 नवगीत

फागुन की पहली हँसी लिए,
आया बसंत सुहाना है,
सूनी डालों के अधरों पर
फिर से गीत सजाना है।

पीली सरसों के आँचल में
धूप सुनहरी सोई है,
कोयल की कूक में जैसे
मन की प्यास संजोई है।

मंद बयार का कोमल स्पर्श
तन-मन को छू जाता है,
सूखी स्मृतियों की शाखों पर
हरापन उग आता है।

यह ऋतु केवल रंग नहीं,
यह जीवन का आह्वान है,
हर ठिठकी हुई आशा का
फिर से हुआ संज्ञान है।

आओ मिलकर गाएँ हम
नव सृजन का मधुर गीत,
बसंत बना दे हर मन को
फूलों-सा कोमल, अतीत-रहित।

धरती का यह नव आलोक
अंतर में भी भर जाए,
हर संशय की शीत लहर
उष्मा में ढलकर मर जाए।

बसंत कहे—
“चलो पुनः प्रारंभ करें,
जीवन को उत्सव मानें।”
नवगीत यही संदेश दे—
हर क्षण में रंग पहचानें। 🌸✨

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