सितारे पर कविता – माधुरी मोहिनी

सितारे पर कविता –  माधुरी मोहिनी

परियाँ नभ लोक धरा उतरी यह देख अचंभित है जन सारे।
मुख ओज भरे चमके छड़ियाँ पर शोभित है मणि राज सितारे।।
कहती सब पूरन कार्य पड़ा सुरधाम चलो शिव है बलिहारे।
यह संगम का युग शेष अभी पुरुषार्थ करो चलना प्रभु द्वारे।।

इस जीवन के अब हो तुम ही प्रिय संबल संभव प्राण पियारे।
हम ढूँढ रहे कल थे जिनको अब ईश कृपा कर दीन्ह हमारे।।
मति मोद भरा गति शुभ्र हुई अब और न चाह सिवाय तुम्हारे।
सब माँग मिली दिल आज खिला पथ में चमके रवि चाँद सितारे।।

तुम साथ रहो शिव साम्ब सदा मनमीत महा महिमा गुण प्यारे।
प्रणशील रहूँ तुम रक्षक हो चमके तुमसे यह भाग्य सितारे।।
दिलराज बने जब से अपने मणि नूर प्रभा दमके सुख सारे।
तुम जीत लिए मन चित्त सभी सुख मान मिला जब से दिल हारे।।

डॉ माधुरी डड़सेना मुदिता

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