सुविधा के विरुद्ध सत्य

सुविधा के विरुद्ध सत्य

मैंने देखा—
लोग सच नहीं ढूँढते,
वे अपनी सुविधा ढूँढते हैं।

भीड़ के कंधों पर चढ़कर
हर कोई ऊँचा दिखना चाहता है,
पर अपने भीतर उतरने से
सब डरते हैं।

हम शोर को संवाद कहते हैं,
सूचनाओं को समझ,
और आदतों को जीवन।

जो बिना प्रश्न चले,
वही स्वीकार्य हो जाता है;
जो ठहरकर देखे—
वह असुविधाजनक ठहरता है।

स्वतंत्रता
कोई उपहार नहीं,
यह तो वह साहस है
जो कीमत माँगता है।

जब तुम
अपनी सुविधा के विरुद्ध
सत्य चुनते हो—
तभी पहली बार
मनुष्य होते हो।

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