मैं हर पत्थर में तुम्हीं को देखता हूँ

मैं हर पत्थर में तुम्हीं को देखता हूँ, मैं हर पत्थर में तुम्हीं को देखता हूँ,जब आँखों से मोहब्बत देखता हूँ।अब जल्दी नहीं कि सामने आओ मेरे,मैं तो तस्वीर भी दूर कर देखता हूँ।जहां में सब उजाले में देखते हैं तुम्हें,मैं तो अंधेरे में तेरा चेहरा देखता हूँ।सब तुझमें, खुद को देखना चाहते थे,मैं चाहता …

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