पीली धूप का आमंत्रण

पीली धूप का आमंत्रण
आज आँगन में उतरी है
धीरे-धीरे,
जैसे किसी माँ ने
नींद से भरे बच्चे को सहलाकर जगाया हो।

पीली धूप ने
खिड़की पर दस्तक दी—
“उठो…
दिन तुम्हें पुकार रहा है।”

सरसों के खेतों ने
अपनी पीली चूनर फैलाई है,
और हवा ने उसमें
सुगंध का संगीत भर दिया है।

धूप कहती है—
“मत रहो बंद कमरों में,
बाहर आओ…
जहाँ उम्मीदें खुली हवा में सांस लेती हैं।”

सूनी पगडंडियाँ
अब उजाले से भर गई हैं,
और मन की थकी हुई दीवारों पर
रंग चढ़ने लगा है।

यह पीली धूप
सिर्फ रोशनी नहीं—
यह विश्वास का आमंत्रण है,
यह नव आरंभ का संकेत है,
यह जीवन को फिर से
गले लगाने की पुकार है।

आओ…
अपने भीतर के अँधेरे को
थोड़ा-सा किनारे रख दें,
और इस पीली धूप को
अपने मन के आँगन में
उतरने दें। 🌼✨

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