May 2020

विकास यात्रा पर कविता-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

विकास यात्रा निकला था वहविकास यात्रा में कमायाअपार धन अर्जित कियाअपार यश अब उसेभूख नहीं लगतीनींद नहीं आती अब केवलअपनी तृष्णा के सहारेजीवित हैविकास यात्री। — नरेन्द्र कुमार कुलमित्र9755852479

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रोटी पर कविता-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

रोटी पर कविता पता नहींइसे रोटी कहूँया भूख या मौतआईना या चाँदमज़बूरी या ज़रूरी कभी मैं रोटी के लिएरोती हूँकभी रोटीमेरे लिए रोती है कभी मैंभूख कोमिटाती हूँकभी भूखमुझे मिटाती है रोटी से सस्तीहोती है मौतवह मिल जाती हैआसानी सेपर रोटी नहीं मिलती रोटी आईना हैजिसमें दिखते हैं हमपर रोटी मेंहम नहीं होतेहमारा आभास होता

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विकास पर कविता-नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

विकास पर कविता उनकी सोच विकासवादी हैउन्हें विश्वास है केवल विकास परविकास के सारे सवालों परवे मुखर होकर देते है जवाबउनके पास मौजूद हैंविकास के सारे आँकड़े कृषि में आत्मनिर्भर हैंखाद्यान से भरे हुए हैं उनके भंडारआप भूख से मरने का सवाल नहीं करनावे आंकड़ों में जीत जाएंगेआप सबूत नहीं दे पाएंगेआपको मुँह की खानी

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रुकना भी है चलना- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

हिंदी कविता

रुकना भी है चलना हमें तो बस यही सिखाया गया है चलते रहो चलते रहोबस चलते ही रहो चलते ही रहने का नाम है जिंदगीरुक जाने से जिन्दगी भी रुक जाएगी तुम्हारीउनके लिए विरोधाभासों में जीना जैसे जिंदगी ही नहीं होतीमैं कहूँ रूकने से जिंदगी सँवर जाती है तो आप हँसेंगेआपने कभी रुकना सीखा ही

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पुरूष सत्ता पर कविता- नरेन्द्र कुमार कुलमित्र

नारी जीवन और संवेदना

पुरूष सत्ता पर कविता लोग कहते रहे हैंमहिलाओं का मनजाना नहीं जा सकताजब एक ही ईश्वर ने बनायामहिला पुरुष दोनों कोफिर महिला का मनइतना अज्ञेय इतना दुरूह क्यों.. ? कहीं पुरुषों ने जान बूझकरअपनी सुविधा के लिएतो नहीं गढ़ लिए हैंये छद्म प्रतिमान ! क्या सचमुच पुरुषों ने कभीसमझना चाहा है स्त्रियों का मन ..?

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कोरोना पर कविता “खट्टी-मीटी “

प्रकृति और पर्यावरण

कोरोना पर कविता छीन लिया तूनें रोजी रोटी , सुख-चैन भी छीन लिया ! छीन लिया आँखों की नींद ,भोजन-भजन भी छीन लिया !! बम से भी खतरनाक है तू , तोप तलवार में ऐसा क्षमता नहीं ! कौनसी शक्ति तुझमें है रे ,तेरा रफ्तार  क्यों थमता नहीं !! बेबस हुआ डाक्टर इंनजिनियर, तंत्र- यंत्र

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प्रेमचन्द साव प्रेम पर कविता

हिंदी कविता

प्रेमचन्द साव प्रेम पर कविता (1)हिमालय है मुकुट जैसा,चरण में हिन्द महासागर।कहीं पर राम जन्मा है,कहीं राधा नटवर नागर।है अपना देश मुनियों का,जहाँ पर धर्म पलता हैं।ये भारत वर्ष हैं अपना,जहाँ है प्रेम का गागर।                (2)जुबां पर प्रेम की बोली,हृदय में धर्म को धारो।कहीं मनभाव में जीना,कहीं मनभाव को मारो।मगर माँ भारती को,जो दिखाए

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धरा पर कविता (दोहा)

हिंदी कविता

धरा पर कविता आज धरा में प्रेम ही, मानवता का सार।। जिनके मन में प्रेम हो, करता नित उपकार।।१।। प्रेम मिले तो दुष्ट भी, बने धरा में संत।। इसकी महिमा क्या कहूंँ, पावन अतुल अनंत।।२।। *अपनी जननी हैं धरा,* प्रेम करे बरसात।। सब कुछ सहकर दें हमें, सुख की सब सौगात।।३।। तरु तरुवर भी प्रेम

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13 मई पर कविता

हिंदी कविता

13 मई पर कविता जीवन के शुभ दिवसों का सबेरा है।मिलती रहे खुशियों का पल बसेरा है।खास जीवन का अहसास कर लें आज।तारीखों में विशेष मैं तेरा(मई 13) है।1।करूँ निवेदन सबको,विद्या का वरदान मिले।हर वक्त काम आए,शिक्षा व सम्मान मिले।जग को देखो समरूप,तुमको समरूपता का ज्ञान मिले।मिले न धन दौलत,जग में ऊँचा तुम्हारा नाम मिले।2।कर्मों

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ममतामयी माँ पर कविता

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। ममतामयी माँ पर कविता माँ तुमनें जन्म दिया,तुम जीवनदायिनी हो।प्यार मिला भी तुमसे,तुम ममतामयी हो।। तुमसे कोई और प्यारा

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माँ की मान पर कविता

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ की मान पर कविता है माँ की शक्ति अपारमाँ है सृष्टि का आधारमाँ के जैसा कोई नहीमाँ का

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माँ ममता की मूरत पर कविता

हिंदी कविता

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है। माँ ममता की मूरत पर कविता ममता की मूरत होती है माँ, अपनी फर्ज निभाती है माँ। प्रीत सरस

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