May 2020

manibhai Navratna

सायली -मनीभाई’नवरत्न’

प्रकृति और पर्यावरण

सायली -मनीभाई’नवरत्न’ चलचित्रसारा आकाशविविध रूप लियेमैं निहारताअपलक।•••••••••••••••••••••••समयबेलगाम साबीत रहा बेपरवाहछोटी होतीजिंदगी।•••••••••••••••••••••••मजदूरजग निर्माताकलयुग का विश्वकर्माकैसा देवता?अभागा।•••••••••••••••••••••••मानवप्रकृति रक्षकभक्षक बन रहालालची बनविडंबना।•••••••••••••••••••••••✒️ मनीभाई’नवरत्न’•••••••••••••••••••••••

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हाइकु

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 10

समाज और यथार्थ

मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 10 1मानवाधिकारजब जग ने जानाराष्ट्र संयुक्त। 2वैश्विक तापसंकट में है राष्ट्रसुधरो आप। 3विश्व की शांतिपृथ्वी की सुरक्षाआतंक मिटा। 4अस्त्र की होड़विकास या विनाशअंधे की दौड़। 5भारत आयारंग भेद खिलाफसंसार जागा। 6चुनौती देतापर्यावरण रक्षाहे राष्ट्र!जुड़ो। 7 “मैं” और “तुम”खींच गई लकीरचलो “हम” हों।8 अस्त्र होती हैहिंसा की प्रतिमूर्तिलेती हैं शांति। 9

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manibhai Navratna

मनीभाई नवरत्न के गीत

समाज और यथार्थ,

मनीभाई नवरत्न के गीत ओ मतवाले अपनी जिंदगी को मौत से मिला ले ।ओ मतवाले ओ दिलवाले।खुद को कर दे देश के हवाले ।ओ मतवाले ओ दिल वाले ।। ये मिट्टी हमारी जन्नत है ।ये मिट्टी हमारी दौलत है ।ये खुशहाल रहे, ये मालामाल रहेयही हमारी मन्नत है । इस मिट्टी पर हम अपना शीश

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मनीभाई नवरत्न के सेदोका

प्रकृति और पर्यावरण

मनीभाई नवरत्न के सेदोका सेदोका – पंछी की दिशा पंछी की दिशाबता रही है सदाहोने को महानिशा। लौट आओ रेघर से जाने वालोंमंजिल बुला रही।  🖊मनीभाई नवरत्न समुद्री हवा समुद्री हवाएक होके बूंदों सेबारिश की तीरों सेबरस रहीमदमस्त गिरि कोधीरे से घिस रही।  🖊मनीभाई नवरत्न जूते बिखरे हुएकई अकेले जूतेहमसफ़र ढूँढे।पुछता नहींकोई हाल उनकीसाथी न हो

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स्काउट जम्बुरी गीत

समाज और यथार्थ

स्काउट जम्बुरी गीत यह गीत स्काउट गाइड और जम्बूरी के महत्व और मूल्यों को दर्शाता है। यहां इस गीत को आगे बढ़ाते हुए प्रस्तुत है: जम्बूरी गीत सबसे अपना गहरा नाता है,सबसे अपनी है प्रीति।आओ एक दूजे को मान दें,समझें सबकी संस्कृति। स्काउट गाइड सिखाताअनुशासन का पाठ,चलो हिलमिल जाएं हम सबमिटाके आपस की दूरी। जम्बूरी…

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दम्भ पर कविता – बाबूलालशर्मा *विज्ञ*

मन और भावनाएँ

दम्भ पर कविता घाव ढाल बन रहे. स्वप्न साज बह गये।. पीत वर्ण पात हो. चूमते विरह गये।। काल के कपाल पर. बैठ गीत रच रहा. प्राण के अकाल कवि. सुकाल को पच रहा. सुन विनाश गान खगरोम की तरह गये।पीत वर्ण……….।। फूल शूल से लगेमीत भयभीत छंदरुक गये विकास नव. छा रहा प्राण द्वंद.

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मोहिनी-डॉ एन के सेठी

हिंदी कविता

मोहिनी-कुंडलियाँ सूरत है मन मोहिनी, राधा माधव साथ।हुए निरख सब बावरे, ले हाथों में हाथ।।ले हाथों में हाथ, छवि लगती अति न्यारी।मुरलि बजाए श्याम,लगे सबकोये प्यारी।।कहता कवि करजोरि,है मनमोहिनी मूरत।सब पाएं सुख चैन, देखके उनकी सूरत।।🕉🕉🕉🕉राधा गोरी है अधिक, साँवले घनश्याम।लगती दोनों की छवी,अनुपमअरुअभिराम।।अनुपम अरु अभिराम, रूप सुंदर है भाया।प्रेमभावअलौकिक,दुनिया को ही सिखाया।।कहत नवल करजोरि,

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पृथ्वीराज पर कविता-बाबूलालशर्मा *विज्ञ*

हिंदी कविता

पृथ्वीराज पर कविता अजयमेरु गढ़ बींठली, साँभर पति चौहान।सोमेश्वर के अंश से, जन्मा पूत महान।। ग्यारह सौ उनचास मे, जन्मा शिशु शुभकाम।कर्पूरी के गर्भ से, राय पिथौरा नाम।। अल्प आयु में बन गए, अजयमेरु महाराज।माँ के संगत कर रहे, सभी राज के काज।। तब दिल्ली सम्राट थे, नाना पाल अनंग।राज पाट सब कर दिया, राय

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नन्ही कदमों पर कविता

हिंदी कविता

नन्ही कदमों पर कविता नन्ही कदमों से कोसों चलेमाँ की आंचल पकड़े -पकड़े !और कितनी दूर जाना है माँकुछ चलकर हो जाते खड़े !! माँ बोली थोड़ी दूर और ..बेटा हमको चलना है !एक बार पहुँच गये तोफिर वही पर ठहरना है !!चुभती गर्मी तपती सड़केंनंगे कदमों पर पड़े हैं छाले !लंगड़ाते कई बार गिरामाँ

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सरकारी रिपोर्ट पर कविता

हिंदी कविता

सरकारी रिपोर्ट पर कविता सरकारी रिपोर्ट में कभीमजदूर नहीं होतेमज़दूरों की पीड़ा नहीं होतीमज़दूरों के बिलखते बच्चे नहीं होतेनहीं होता उनके अपनी धरती से पलायन होने का दर्दनहीं होती उनकी भूख और प्यास की कथाबूढ़े माँ-बाप से अलगाव की मज़बूरीऔर शासन-प्रशासन की नाकामी की बातसरकारी रिपोर्ट में कतई नहीं होती सरकारी रिपोर्ट में होती हैखोखली

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