July 2020

प्रकृति का इंसाफ- मोहम्मद अलीम

प्रकृति और पर्यावरण

प्रकृति का इंसाफ 1.उदयाचल से अस्ताचल तक,कैसी ये वीरानी है |उत्तर से दक्षिण तक देखो ,मानव माथ पर परेशानी है || 2. पूरब से चली दनुज पुरवाई ,मानव मानव का नाशक बनकर |खड़ा है द्वारे एक विषाणुसृष्टि में नर पिशाचक बनकर || 3.चीन वुहान का एक विषाणु ,संक्रामक संक्रमण फैलाया है |विश्व स्वास्थ्य संगठन में

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हिन्दी कविता: अब तो पाठ पढ़ाना है

हिंदी कविता

अब तो पाठ पढ़ाना है
★★★★★★★★★
फिर सीमा में आ जाए तो,
गलवान को याद दिलाना है।
दुस्साहस कर न सके वह,
ऐसी सबक सिखाना है।
ए वीर जवानों सुन लो,
सबको यह बताना है।
कब तक चीनी विष घोलेंगे,
अब तो पाठ पढ़ाना है।
प्राण जाय पर वचन न जाय,
ऐसी कसम जो खाना है।
थर थर काँप उठे रूह उनका,
ऐसी सजा दिलाना है।
कलाम की परमाणु याद दिला दो,
बासठ का अब नही जमाना है।
कब तक चीनी विष घोलेंगे,
अब तो पाठ पढ़ाना है।
★★★★★★★★★★★★
रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822

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dr bhimrao ambedkar

भीम बाबा पर कविता

समाज और यथार्थ

भीमराव रामजी आम्बेडकर (14 अप्रैल, 1891 – 6 दिसंबर, 1956), डॉ॰ बाबासाहब आम्बेडकर नाम से लोकप्रिय, भारतीय बहुज्ञ, विधिवेत्ता, अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ, और समाजसुधारक थे।[1] उन्होंने दलित बौद्ध आंदोलन को प्रेरित किया और अछूतों (दलितों) से सामाजिक भेदभाव के विरुद्ध अभियान चलाया था। श्रमिकों, किसानों और महिलाओं के अधिकारों का समर्थन भी किया था। वे स्वतंत्र भारत के प्रथम विधि एवं न्याय मन्त्री, भारतीय संविधान के जनक एवं भारत गणराज्य के निर्माताओं में से एक थे। भीम बाबा पर कविता

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