8 सितम्बर विश्व साक्षरता दिवस पर कविता

8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। साक्षरता दिवस समाज में शिक्षा के प्रचार प्रसार के उद्देश्य से दुनिया भर में मनाया जाता है। भारत में भी विश्व साक्षरता दिवस को महत्वपूर्ण दिन के तौर पर मनाते हैं। सर्व शिक्षा अभियान के जरिए साक्षरता की दिशा में भारत सराहनीय कार्य कर रहा है।

8 सितंबर साक्षरता दिवस पर कविता

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

8 सितंबर saksharta divas par kavita आह्वान आचार्य मायाराम ‘पतंग एक बार पढ़ने तो आओ । हर सपना साकार बनेगा || यह मत समझो, बड़ी उम्र में पढ़ पाना ज्यादा भारी है। सच तो यह है, उम्र तुम्हारी समझाने में सहकारी है ॥ एक बार आगे तो आओ। पथ तो अपने आप बनेगा । एक […]

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साक्षरता अभियान – बाबूराम सिंह

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विश्व साक्षरता दिवस की हार्दिक मंगल शुभ कामनायें साक्षरता अभियान —————————–साक्षरता अभियान चलायें,घर-घर अलख जगायें। जन-जन साक्षर भव्य बनायें,ज्ञान ज्योति फैलायें। बिना विद्या नर बैल समाना ,कहता है जग सारा।मिटे नहीं विद्या बिन कभीभी,मानव मनअँधियारा।तम अंधकार तिमिर सभी मिल,आओ दूर भगायें।साक्षरता अभियान चलायें ,घर-घर अलख जगायें। विद्या धन ऐसा है जगत में,बाँट न सकता कोई।बिन

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साक्षरता का अर्थ बताती कविता

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प्रस्तुत हिंदी कविता का शीर्षक साक्षरता है जो कि साक्षरता का अर्थ बताती कविता हैं

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हिन्दी कविता: अब तो पाठ पढ़ाना है

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अब तो पाठ पढ़ाना है
★★★★★★★★★
फिर सीमा में आ जाए तो,
गलवान को याद दिलाना है।
दुस्साहस कर न सके वह,
ऐसी सबक सिखाना है।
ए वीर जवानों सुन लो,
सबको यह बताना है।
कब तक चीनी विष घोलेंगे,
अब तो पाठ पढ़ाना है।
प्राण जाय पर वचन न जाय,
ऐसी कसम जो खाना है।
थर थर काँप उठे रूह उनका,
ऐसी सजा दिलाना है।
कलाम की परमाणु याद दिला दो,
बासठ का अब नही जमाना है।
कब तक चीनी विष घोलेंगे,
अब तो पाठ पढ़ाना है।
★★★★★★★★★★★★
रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822

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किताब की महत्ता पर रमा की कविता

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किताब की महत्ता *किताब* नित किताब को मनुज पढ़, करले अर्जित ज्ञान।दिव्य आचरण तब बने, मिले जगत सम्मान।। सारे किताब श्रेष्ठ हैं, करना मत तू मोल।शिक्षित होने के लिए, दिव्य ज्ञान मन घोल।। पढ़ना लिखना सीख कर, करलो नेकी कार्य।पोथी पठन कर भव में, विद्या कर सिर धार्य।। ज्ञानालय में बैठकर, पढ़ते सभी किताब।विद्या धन

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हिन्दी कविता: सीसीई (सतत् व्यापक मूल्यांकन) – मनीभाई नवरत्न

समाज और यथार्थ,

सतत व्यापक मूल्यांकन पर आधारित कविता, जिसे मैंने सन् 2013 में विज्ञान प्रशिक्षण के मास्टर ट्रेनर बनने के दौरान लिखा था ताकि शिक्षकों को सतत व्यापक मूल्यांकन की उपयोगिता पता चल सके.

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