April 2021

मैं इंसान हूं मेरे भी अरमान है- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मैं इंसान हूं मेरे भी अरमान है- मनीभाई नवरत्न मैं इंसान हूं मेरे भी अरमान है ।जैसे तेरी पहचान वैसे मेरी पहचान है। जो तू सोचता है वह मेरी सोच है ।जो तू खोजता है वह मेरी खोज है।इस बात पर भला क्यों अनजान है ? मैं इंसान हूं….जब मैं राहों से गुजरता हूं तु […]

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यह कैसा लोकतंत्र – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस कविता में मानव के अनैतिक व्यवहार का वर्णन मिलता है जिसने उसे मानव से दानव की श्रेणी में ला खड़ा किया है |
यह कैसा लोकतंत्र – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार “अंजुम”

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किस राह – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

समाज और यथार्थ

इस रचना में वर्तमान सामाजिक परिवेश में मानव की स्थिति को दर्शाया गया है वह स्वयं को असहाय सा महसूस कर रहा है |
किस राह – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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