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वन्दनवार:भारतीय के शत्रु हैं भारतीय ही आज
झाँसी की रानी- एक श्रद्धांजलि – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
ये तो बस मूर्खों की पीढ़ी बनायेगा
देवी के अनेक रूप / प्रिया शर्मा
कल का दौर भी देखा -अक्षय भंडारी
बेख़याल – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
वक़्त बेवक्त जिन्दगी- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”
हम बच्चे थे…………तब अच्छे थे
मुश्किल राहें प्यार की -आर्यन सिंह यादव
बेखुदी की जिंदगी- मनीभाई नवरत्न
मुझे तेरी हर बातें याद आते हैं- मनीभाई नवरत्न
हे दीन दयालु हे दीनानाथ- मनीभाई नवरत्न
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