दीप शिखा- ( ताटंक छंद विधान )
हिंदी कवितादीप शिखा- ( ताटंक छंद विधान ) सुनो बेटियों जीना है तो,शान सहित,मरना सीखो।चाहे, दीपशिखा बन जाओ,समय चाल पढ़ना सीखो। रानी लक्ष्मी दीप शिखा थी,तब वह राज फिरंगी था।दुश्मन पर भारी पड़ती पर,देशी राज दुरंगी था।१.बहा पसीना उन गोरों को,कुछ द्रोही रजवाड़े में।हाथों में तलवार थाम मनु,उतरी युद्ध अखाड़े में। अंग्रेज़ी पलटन में उसने,भारी मार […]
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