September 2022

शबा राव की कवितायेँ

समाज और यथार्थ

शबा राव की कवितायेँ आज की बात मैं घर से निकली पढ़ाई के लिए,बस अड्डे पर बस का इंतजार करते रहे,कुछ देर बाद बस आ गई,मैं और बाकी के लोग बस में बैठ गए। बस में बैठी महिला मेरे से बात करने लगी,मैंने उनसे पूछा तुम क्या करती हो?महिला ने जवाब दिया बड़े बड़े घरों […]

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गणेश जी की प्रतिमा – एस के नीरज

हिंदी कविता

गणपति को विघ्ननाशक, बुद्धिदाता माना जाता है। कोई भी कार्य ठीक ढंग से सम्पन्न करने के लिए उसके प्रारम्भ में गणपति का पूजन किया जाता है। भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का दिन “गणेश चतुर्थी” के नाम से जाना जाता हैं। इसे “विनायक चतुर्थी” भी कहते हैं । महाराष्ट्र में यह उत्सव सर्वाधिक

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आखिर क्यों? – सृष्टि कुमारी

समाज और यथार्थ

आखिर क्यों? क्यों बना दिया मुझे पराया? क्यों कर दिया आपने मेरा दान?एक बेटी पूछ रही पिता से,क्या मेरी नहीं कोई अपनी पहचान? बेटों के आने पर खुशियां मनाते हो,फिर बेटी के आने पर हम क्यों?एक बेटी पूछ रही पिता से,हम भी तो आपके ही अंश हैं, क्यों मुझे पराया कहते हो? कभी मां, कभी

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हे गणनायक – विनोद कुमार चौहान

हिंदी कविता

हे गणनायक (सार छंद) हे गणनायक हे लम्बोदर, गजमुख गौरी नंदन।लोपोन्मुख थाली से होते, अक्षत-रोली-चंदन।। हे शशिवर्णम शुभगुणकानन, छाई है लाचारी।बढ़ती मँहगाई से अब तो, हारी जनता सारी।। हे यज्ञकाय हे योगाधिप, भोग लगाऊँ कैसे।मोदक की कीमत तो बप्पा, बढ़े कनक के जैसे।। हे उमापुत्र हे प्रथमेश्वर, मँहगे हैं अब ईंधन।मूषक वाहन ही अच्छा है,

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गौरी पुत्र गणेश – सुकमोती चौहान

हिंदी कविता

गौरी पुत्र गणेश आओ हे गौरी पुत्र गणेश!हरने हम सब के क्लेश। अग्र पूजन के अधिकारी,ज्ञान विद्या के भंडारी,मंगल मूर्ति अतुल बलधारी,पधारो हे गजानन!भरने जीवन में आनंद।आओ हे गौरी पुत्र गणेश!हरने हम सबके क्लेश | शिव शक्ति के तुम दुलारे,देवगणों के हो नायक।कर्म को पूजा माने आप,अष्ट सिद्धि के दायक ।विराजो हे कृपा निधान!देने बुद्धि

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बचपन पर कविता

विज्ञान, तकनीक और भविष्य

जन्म से लेकर किशोरावस्था तक के आयु काल को कहते है। विकासात्मक मनोविज्ञान में, बचपन को शैशवावस्था (चलना सीखना), प्रारंभिक बचपन (खेलने की उम्र), मध्य बचपन (स्कूली उम्र), तथा किशोरावस्था (वयः संधि) के विकासात्मक चरणों में विभाजित किया गया है। इसी प्यारे बचपन पर ही आधारित है यह बचपन पर कविता बचपन पर कविता मेरा बचपन-

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morning

प्रात: वन्दन – हरीश बिष्ठ शतदल

हिंदी कविता

प्रात: वन्दन करे अमंगल को मंगल, पवनपुत्र हनुमान |सम्मुख उनके आने से , डरें सभी शैतान || हृदय बसे सिया-राम जी, श्रद्धा-भक्ति अपार |शिवजी के बजरंगबली , जग में रूद्र अवतार || संकट सारे भक्तों के , पल में देते टार |भजे सिया अरु राम संग़, यह सारा संसार || भक्तों में सर्वश्रेष्ठ हैं ,

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वीर जवानों तुझे सलाम – बाबूराम सिंह

हिंदी कविता

वीर जवानों तुझे सलाम आन – बान और शान देश की नही रुकने देते।वन्दे मातरम गान तिरंगा झंडा़ नहीं झुकने देते ।देश हित में फूलते-फरते करते सदा देशका नाम।देशकी खातीर जीते मरते वीर जवानों तुझेसलाम। बुरे नियत वालों को नाकों चना चबवा देते।दुश्मनों को धूल चटा छण भर में छक्का छुडा़ देते। राष्ट्र रोग को

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शिक्षक की अभिलाषा – अखिल खान

समाज और यथार्थ

5 अक्टूबर 1994 को यूनेस्को ने घोषणा की थी कि हमारे जीवन में शिक्षकों के योगदान का जश्न मनाने और सम्मान करने के लिए इस दिन को विश्व शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाएगा। डॉ. राधाकृष्णन जैसे दार्शनिक शिक्षक ने गुरु की गरिमा को तब शीर्षस्थ स्थान सौंपा जब वे भारत जैसे महान् राष्ट्र

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गुरु ज्ञान का सागर -रुपेश कुमार

हिंदी कविता

गुरु ज्ञान का सागर जीवन की सबसे पहले गुरु ,माता पिता होते है ,जीवन में गुरु का नाम ,सबसे ऊंचा होता है ,गुरु जीवन में मेरे ,साइकिल के पहिए जैसा होते है ,गुरु ज्ञान का सागर ,गुरु महासागर होते है ! गुरु बिन ज्ञान हमें नहीं ,कभी नहीं है मिलता ,गुरु बिन जीवन की कल्पना

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स्वच्छता अभियान चाहिए

प्रकृति और पर्यावरण

स्वच्छता अभियान चाहिए दया-धर्म करुणामय पावनअधरोंपर मुस्कान चाहिए।अनमोल मानव जीवनमें स्वच्छता अभियान चाहिए। परमार्थ परहित पुरुषार्थ क्षमा शीलता दान चाहिए।स्वच्छता से नेक कमाई भोजन वस्त्र मकान चाहिए। देशधर्म सत्कर्म सुपावन प्रगतिपथ कल्यान चाहिए।नेकी भलाई पुण्य में भी स्वच्छता अभियान चाहिए। बन्धुत्व एकत्व समत्व का निज अंतः में भान चाहिए।हरि दिखे हर-हर में हरदम ऐसा सुमिरन

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दीपक सा जलता गुरू

हिंदी कविता

दीपक सा जलता गुरू दीपक सा जलता गुरू,सबके हित जग जान।गुरू से हीं पाते सभी, सरस विद्या गुण ज्ञान।। जग में गुरु सिरमौर है,तम गम हरे गुमान।भर आलोक जन-मन सदा ,देते है मुस्कान।। निर्झर सा निर्मल गुरू ,मन का होता साफ।शुचिता का छोड़े सदा ,सभी के उपर छाप।। महिमाअनूठा गुरु की,अग-जग सदा महान।चरणों में गुरू

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