माँ दुर्गा पिरामिड कविता

jai durga maa

दुर्गा या आदिशक्ति हिन्दुओं की प्रमुख देवी मानी जाती हैं जिन्हें माता, देवीशक्ति, आध्या शक्ति, भगवती, माता रानी, जगत जननी जग्दम्बा, परमेश्वरी, परम सनातनी देवी आदि नामों से भी जाना जाता हैं।शाक्त सम्प्रदाय की वह मुख्य देवी हैं। दुर्गा को आदि शक्ति, परम भगवती परब्रह्म बताया गया है।

माँ दुर्गा पिरामिड कविता

माँ!
रूपा
मोहिनी
वर दात्री
अरि मर्दनी
संकट हरणी
जय जगजननी ।
माँ
नेह
उदधि
आल्हादिनी
सर्वव्यापिनी
मंगल करणी
सर्व  दुख हरणी ।
माँ
सृष्टा
ब्रम्हाण्ड
अतुलित
त्रिगुण मयी
मारण कारण
हे काली कपालिनी।
माँ!
ज्योति
स्वरूपा
जगमग
चिर उजास
परम प्रकाश
हे उर्जा स्त्रोतस्वनी।
माँ
बूँद
विराट
कण कण
धरा गगन
उदरपोषिणी
नमन अन्नपूर्णे।
माँ!
दुर्गा
कालिके
शिव शक्ति
मधुर स्मिता
हे सिंह वाहिनी
अस्त्र शस्त्र धारिणी।
माँ!
नित्या
चंचला
सदा सौम्या
हिय वासिनी
सर्व शान्ति रम्या
हे शुभे शुभंकरी।
माँ !
श्रद्धा
विश्वास
नेह प्यास
परम आस
काया माया छाया
बसती हर साँस।
माँ !
धारा
ममता
उज्जवल
पावन नेहा
सरल सरिता
भरे जीवन प्राण ।
माँ!
सदा
सरला
क्षमा दात्री
जीवन दायी
पथ प्रदर्शक
नौ दिन नवरात्रि ।
सुधा शर्मा
राजिम छत्तीसगढ़

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