जीवन के योग्य कर्म

जीवन के योग्य कर्म

किसी काम के लिए जियो
जिसके लिए
मरने का साहस
रख सको।

यही
तुम्हारा पेशा हो।

क्योंकि
काम
सिर्फ़ रोज़ी नहीं,
वह
तुम्हारे जीवन का
सबसे बड़ा हिस्सा है।

जागते समय का
अधिकांश भाग
तुम
उसी में
खपा दोगे।

तो पूछो—
इस एक जीवन के
इतने समय के साथ
क्या करना
सार्थक है?

अधिकांश लोग
गलत कारणों से
काम चुन लेते हैं—
सुरक्षा,
परंपरा,
दबाव,
संयोग।

फिर
ऊब,
कड़वाहट,
चिड़चिड़ापन
उनका स्वभाव
बन जाता है।

काम की गुणवत्ता
तनख़्वाह से नहीं,
तालियों से नहीं—
भीतर की अवस्था से
मापी जाती है।

उस प्रेम से
जिसे तुम
हर दिन
उसमें डालते हो।

अपने आप से पूछो—
अगर पैसा न मिले,
तो भी
क्या मैं यह करूँगा?

अगर उत्तर
हाँ है—
अगर कोई काम
तुम्हें
पूरी तरह
पुकारता है—
तो समझो
तुम्हें
अपना कर्म
मिल गया।

और तब
जीवन
सच में
जीने योग्य
हो जाता है।
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