अनिश्चित रहें, जीवित रहें

Stay Uncertain, Stay Alive
(विचारप्रद, सत्यनिष्ठ, विचारोत्तेजक अतुकांत कविता)

भ्रम में होना
मर जाना नहीं है—
खोज में होना
जीवित होना है।

यह बेहतर है
कि तुम प्रश्नों के साथ चलो,
बजाय इसके
कि झूठे विश्वास में
रुक जाओ।

तुम्हें confidence नहीं चाहिए,
तुम्हें चाहिए
ईमानदारी
और जिज्ञासा।

जो बहुत आत्मविश्वासी दिखते हैं,
अक्सर
अपने डर को
मुस्कान से ढँक लेते हैं।
उनका “मैं जानता हूँ”
कभी-कभी
अज्ञान का शोर होता है।

इसलिए
खोजी बने रहो।
मान लो कि
सब कुछ स्पष्ट नहीं है—
और फिर भी
जीना संभव है।

मन जल्दी
निष्कर्ष चाहता है।
उसे अधूरापन चुभता है,
अनिश्चितता डराती है।
वह कहता है—
या हाँ, या नहीं।
पर जीवन
इन दो खानों में
समाता नहीं।

जीवन
लगातार ध्यान माँगता है,
लगातार जाँच।

हम उन्हें पूजते हैं
जो ज़ोर से कहते हैं—
“मैं जानता हूँ।”
और उनसे कतराते हैं
जो कहते हैं—
“मैं जानने की कोशिश कर रहा हूँ।”

क्योंकि हमें
प्रक्रिया नहीं,
परिणाम चाहिए।
हमें यात्रा नहीं,
मंज़िल चाहिए—
ताकि जल्दी
खुशी निकाल सकें।

पर खुशी
निष्कर्ष में नहीं,
खोज में छुपी है।
सवाल में है,
चलते रहने में है।

यह ठीक है
कि तुम बहुत confident न लगो।
निष्कर्षों से
सावधान रहो,
यात्रा जारी रखो।

क्योंकि
अगर सफ़र में
आनंद नहीं,
तो जीवन में
कैसा आनंद?

अनिश्चित रहो—
सजग रहो।
चलते रहो—
यही
जीवित होने की पहचान है।

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