मन भँवरा नर देह
हिंदी कवितामन भँवरा नर देह भोर कुहासा शीत ऋतुतैर रहे घन मेह।बगिया समझे आपदावन तरु समझे नेह।।.तृषित पपीहा जेठ मेंकरे मेह हित शोरपावस समझे आपदाकोयल कामी चोर करे फूल से नेह वहमन भँवराँ नर देह।भोर……………..।।.ऋतु बासंती आपदासावन सिमटे नैनविरहा तन मन कोकिलाखोये मानस चैन पंथ निहारे गेह कायाद करे हिय गेह।भोर…………….।। याद सिंधु को कर रहाभटका […]


