कविता बहार

struggle

हम उजाला जगमगाना चाहते हैं -केदारनाथ अग्रवाल

हिंदी कविता

हम उजाला जगमगाना चाहते हैं -केदारनाथ अग्रवाल हम उजाला जगमगाना चाहते हैंअब अँधेरे को हटाना चाहते हैं। हम मरे दिल को जिलाना चाहते हैं,हम गिरे सिर को उठाना चाहते हैं। बेसुरा स्वर हम मिटाना चाहते हैं।ताल-तुक पर गान गाना चाहते हैं। हम सबों को सम बनाना चाहते हैं।अब बराबर पर बिठाना चाहते हैं। हम उन्हें […]

हम उजाला जगमगाना चाहते हैं -केदारनाथ अग्रवाल Read More »

सपनों को साकार करें -प्रेमशंकर रघुवंशी

हिंदी कविता

सपनों को साकार करें -प्रेमशंकर रघुवंशी आओ, हम सब भारत मां की माटी से श्रृंगार करें! यह वह धरती, जिसने हमको निज उत्सर्ग सिखाया है,यह वह धरती, जिसने हमको अपना अमिय पिलाया है।आज उसी धरती की रक्षा में अपने उद्गार करें! इस जीवन-धन से भी प्यारा हमको अपना देश है,अलग-अलग हैं पंथ हमारे, किन्तु एक

सपनों को साकार करें -प्रेमशंकर रघुवंशी Read More »

village based Poem

गाँव की महिमा पर अशोक शर्मा जी की कविता

हिंदी कविता

गाँव की महिमा पर अशोक शर्मा जी की कविता गांव और शहर लोग भागे शहर-शहर , हम भागे देहात,हमको लागत है गाँवों में, खुशियों की सौगात। उहाँ अट्टालिकाएं आकाश छूती, यहाँ झोपड़ी की ठंडी छाँव।रात रात भर चलता शहर जब,चैन शकून से सोता गाँव। जगमग जगमग करे शहर, ग्राम जुगनू से उजियारा है।चकाचैंध में हम

गाँव की महिमा पर अशोक शर्मा जी की कविता Read More »

प्रताप का राज्यारोहण-बाबूलाल शर्मा

हिंदी कविता

प्रताप का राज्यारोहण-बाबूलाल शर्मा मापनी- २२१ २२२, १२२ १२२ २२ वाचिक. *प्रताप का राज्यारोहण*. १सामंत दरबारी, कहे यह कुँवर खल मति मद।रक्षण उदयपुर हित, सँभालो तुम्ही राणा पद।सौगंध बप्पा की, निभे जब मुगल हो बाहर।मेवाड़ का जन जन, पुकारे सजग उठ नाहर।. २राणा बनो कीका, कुँवर अब स्वजन से अड़ कर।महिमा रखें महि भी, हमारी

प्रताप का राज्यारोहण-बाबूलाल शर्मा Read More »

पृथ्वीराज चौहान पर दोहे – बाबू लाल शर्मा

हिंदी कविता

पृथ्वीराज चौहान पर दोहे (दोहा छंद) अजयमेरु गढ़ बींठली, साँभर पति चौहान।सोमेश्वर के अंश से, जन्मा पूत महान।। ग्यारह सौ उनचास मे, जन्मा शिशु शुभकाम।कर्पूरी के गर्भ से, राय पिथौरा नाम।। अल्प आयु में बन गए, अजयमेरु महाराज।माँ के संगत कर रहे, सभी राज के काज।। तब दिल्ली सम्राट थे, नाना पाल अनंग।राज पाट सब

पृथ्वीराज चौहान पर दोहे – बाबू लाल शर्मा Read More »

मतदान विषय पर दोहे- बाबू लाल शर्मा

नारी जीवन और संवेदना

मतदान विषय पर दोहे- बाबू लाल शर्मा सोच समझ मतदान (दोहा-छंद)1.मत अयोग्य को दें नहीं, चाहे हो वह खास।वोट देय हम योग्य को, सब जन करते आस।। 2.समझे क्यों जागीर वे, जनमत के मत भूल।उनको मत देना नहीं, जिनके नहीं उसूल।। 3.एक वोट शमशीर है, करे जीत या हार।इसीलिए मतदान कर, एक वोट सरकार।। 4.मतदाता

मतदान विषय पर दोहे- बाबू लाल शर्मा Read More »

शुभकामना विषय पर दोहा -बाबू लाल शर्मा

समाज और यथार्थ

शुभकामना विषय पर दोहा -बाबू लाल शर्मा करूँ सदा शुभ कामना, उन्नत होवे देश।भूमण्डल सरनाम हो, उज्ज्वल हो परिवेश।। देश वासियों के लिये, नये साल संदेश।जनता को शुभकामना, खुशियाँ सभी प्रदेश।। सामाजिक परिवेश में, मानव मान समाज।सबके हित शुभकामना, नये साल की आज।। नारी को शुभकामना, मैं देता करजोर।शक्ति देश की ये बने, बढ़े उन्नति

शुभकामना विषय पर दोहा -बाबू लाल शर्मा Read More »

मकर से ऋतुराज बसंत (दोहा छंद)-बाबू लाल शर्मा

हिंदी कविता

मकर से ऋतुराज बसंत (दोहा छंद)-बाबू लाल शर्मा सूरज जाए मकर में, तिल तिल बढ़ती धूप।फसले सधवा नारि का, बढ़ता रूप स्वरूप।।.पशुधन कीट पतंग भी, नवजीवन मम देश।वन्य जीव पौधे सभी, कली खिले परिवेश।।.तितली भँवरे मोर पिक, करते हैं मनुहार।ऋतु बसंत के आगमन, स्वागत करते द्वार।।.मानस बदले वसन ज्यों, द्रुम दल बदले पात।ऋतु राजा जल्दी

मकर से ऋतुराज बसंत (दोहा छंद)-बाबू लाल शर्मा Read More »

वट सावित्री पूजा पर दोहे -बाबू लाल शर्मा

नारी जीवन और संवेदना

वट सावित्री पूजा पर दोहे -बाबू लाल शर्मा वट सावित्री पूज कर, जो रखती उपवास।धन्य धन्य है भारती, प्राकत नारी आस।। ढूँढे पूजन के लिए, बरगद दुर्लभ पेड़।पथ भी दुर्गम हो रहे, हुई कँटीली मेड़।। पेड़ सभी है काम के, रखना इनका ध्यान।दीर्घ आयु होता सखे, वट का पेड़ महान।। पुत्र सरीखे पालिए, सादर तात

वट सावित्री पूजा पर दोहे -बाबू लाल शर्मा Read More »

गोवर्धन विषय पर दोहे -बाबू लाल शर्मा

हिंदी कविता

गोवर्धन विषय पर दोहे -बाबू लाल शर्मा (दोहा छंद)गिरि गोवर्धन नख धरे, करे वृष्टि से रक्ष!दिए चुनौती इन्द्र को, जन गोधन के पक्ष!! महिमा हुई पहाड़ की, करे परिक्रम लोग!मानस गंगा पावनी, गिरिधर पूजन भोग!! द्वापर में संदेश वर, दिया कृष्ण भगवान!गो,गोधन पशुधन भले, कृषि किसान सम्मान!! भारत कृषक प्रधान है, गोधन वर धन मान!कृष्ण

गोवर्धन विषय पर दोहे -बाबू लाल शर्मा Read More »

mahatma gandhi

बापूजी पर दोहे -बाबू लाल शर्मा

हिंदी कविता

बापूजी पर दोहे -बाबू लाल शर्मा भारत ने थी ली पहन, गुलामियत जंजीर।थी अंग्रेज़ी क्रूरता, मरे वतन के वीर।। काले पानी की सजा, फाँसी हाँसी खेल।गोली गाली साथ ही , भर देते थे जेल।। याद करे जब देश वह, जलियाँवाला बाग।कायर डायर क्रूर ने, खेला खूनी फाग।। मोहन, मोहन दास बन, मानो जन्मे देश।पढ़लिख बने

बापूजी पर दोहे -बाबू लाल शर्मा Read More »

Scroll to Top