माँ गंगा पर कविता
हिंदी कवितामाँ गंगा पर कविता कलयुग के अत्याचारों को देख, माँ गंगा पुकारे….वर्षों के पावन तप से , मैं इस धरती पर आयी।पर आज मनुज ने देखो, मेरी कैसी गति बनायी।निर्मल थी मैं मैली हो गयी, तुम सबके कुकृत्यों से।कूड़े- कचरे और गंदे जल के, मोटे- मोटे नालो से।याद करो त्रेतायुग के, उन महा-प्रतापी राजाओं को।सगर, […]
