ज्ञान दो वरदान दो माँ
हिंदी कविताज्ञान दो वरदान दो माँ सत्य का संधान दो।बिंदु से भी छुद्रतम मैंकृपा का अवदान दो। अवगुणों को मैं समेटेमाँ पतित पातक हूँ मैं।मोह माया से घिरा हूँ,निपट पशु जातक हूँ मैं।अज्ञानता मन में बसाये ।अहम,झूठी शान हूँ मैं।लाख मुझ में विषमताएं।गुणी तुम अज्ञान हूँ मैं। है तिमिर सब ओर माता,ज्योति का आधान दो माँ।ज्ञान […]
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