कोरोना चालीसा पर कविता
Uncategorizedकोरोना चालीसा पर कविता नर रसना के स्वाद का, कोरोना परिणाम।चमगादड़ के सूप का, मचा हुआ कोहराम।।१।। करता कोई एक है, भरता ये संसार।घूम -घूम वो नर करें, व्याधि का संचार।।२।। *चौपाइयाँ* कैसे कटे दिवस हे भाई ।लगता जीव लता मुरझाई।।१।। संकट खड़ा करें हरजाई ।कैसे इसकी हो भरपाई।।२।। महा शाप ये इस सृष्टि का […]
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