सौ प्यास कैसे बुझे पर कविता
हिंदी कवितासौ प्यास कैसे बुझे पर कविता मुझे कुछ ना सुझेभला एक बूंद मेंसौ प्यास कैसे बुझे ?तू मेरी ना सोच ,जा किसी चोंचअमृत बन .मेरी यही नियति हैकि तड़प मरूँअति महत्वाकांक्षा में.अब जान पाया हूंकि उचित हैसफर करना शून्य से शिखर तक.जीवन की ढलानहोती है भयानकऔर उससे भी कटुमेरी ये अकड़जो झुके तो भी ना
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